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जयपुर में मुख्यमंत्री आवास पर जब किसी एक खास जिले की पूरी सियासी जमात को एक साथ तलब किया जाए, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही किसी बड़े सियासी तड़के के इंतजार में है। गुरुवार यानी 8 अक्टूबर को सीएम आवास का नजारा कुछ ऐसा ही था। मौका था राजस्थान के आगामी पंचायतीराज चुनावों की रणनीति तय करने का, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात की कम है कि रणनीति क्या बनी, बल्कि फुसफुसाहट इस बात की ज्यादा है कि बंद कमरे के भीतर चली ‘क्लास’ में किसने किस पर नजरें तिरछी कीं और किसने बनावटी मुस्कान के पीछे अपनी असहजता छिपाई।
सूत्रों के मुताबिक, कहने को तो बैठक का आधिकारिक एजेंडा यह था कि हनुमानगढ़ जिले में जिला प्रमुख की कुर्सी के साथ-साथ सभी पंचायत समितियों में भाजपा का ही बोर्ड बने। लेकिन सियासी गलियारों में खबर रखने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि जब आलाकमान को बार-बार ‘आपसी गिले-शिकवे भुलाने’ और ‘तालमेल बैठाने’ की हिदायत देनी पड़े, तो इसका सीधा मतलब होता है कि अंदरूनी खींचतान अपनी चरम सीमा पर है।
सूूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नेताओं को दो टूक लहजे में नसीहत दी कि अगर ‘अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग’ अलापना बंद नहीं किया, तो नतीजे मनमाफिक नहीं आएंगे। दरअसल, हाल ही में हुए शहरी निकाय चुनावों में जिले के भीतर जो अंतर्कलह खुलकर आई थी, उसकी टीस अभी तक पार्टी नेतृत्व के जेहन में ताजा है। निकाय चुनाव में पार्टी के लचर प्रदर्शन का हिसाब-किताब भी इस बैठक में परोक्ष रूप से सामने आया। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो सीएम ने साफ लफ्जों में चेता दिया कि अगर निकाय चुनाव वाली लापरवाही गांवों में दोहराई गई, तो जिम्मेदारी तय करने में पार्टी जरा भी संकोच नहीं करेगी।
बैठक में मौजूद नेताओं की फेहरिस्त पर गौर करें तो यह अपने आप में जिले के सियासी रसूखदारों का भारी-भरकम जमघट था। प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल, जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, पूर्व जिलाध्यक्ष रामकृष्ण भाकर, काशीराम गोदारा, बलवीर बिश्नोई, देवेंद्र पारीक, पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप से लेकर मौजूदा विधायक संजीव बेनीवाल, पूर्व संसदीय सचिव जयदीप डूडी, पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया, रामप्रताप कासनिया, गुरदीप कासनिया, धर्मेंद्र मोची, कृष्ण कड़वा और युवा चेहरे अमित चौधरी, सब एक ही कमरे में अगल-बगल बैठे थे।
हनुमानगढ़ की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि इनमें से कई नेताओं के बीच 36 का आंकड़ा कोई ढकी-छुपी बात नहीं है। टिकट वितरण से लेकर इलाके में चौधराहट कायम करने तक, इन क्षत्रपों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। ऐसे में जब प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बूथ स्तर की मजबूती और जमीनी पकड़ का पाठ पढ़ाया, तो बैठक में मौजूद कई नेता सिर हिलाते जरूर दिखे, मगर सियासी पंडित चुटकी ले रहे हैं कि बाहर निकलते ही क्या यह एकजुटता कायम रह पाएगी?
भाजपा नेता अमित चौधरी ने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से कहा, ‘सब कुछ बहुत सकारात्मक रहा और नए जोश के साथ मैदान में उतरेंगे। न सिर्फ जिला प्रमुख बल्कि जिले की सभी पंचायता समितियों में बीजेपी का बोर्ड बनेगा।’






