May 14, 2026

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रूंख भायला.मनवार होवती ही हेताळू हाथां सूंअपणायत री सोरम फूटती बांरी बातां सूंहाथ है बैई अर बातां...
राजेश चड्ढ़ाभारत दी पवित्र धरती ते बहोत सारे संत अते महापुरुख प्रगट होये हन, जिन्हाँ ने धर्म...
ओम बिश्नोई.मित्र से विमर्श चल रहा था, विषय था शिक्षा। उसने तर्क रखा, ‘नो फ्री लंच मित्र!...
राजेश चड्ढ़ा.नवीं पँजाबी कविता विच नवेंपन दा प्रवेश मोहन सिंह अते उन्हाँ दे कुज समकालियाँ दी सृजनात्मकता...
रूंख भायला.पुन्न बडेरां रा आछा, बरकत है बां री रीतां मेंतिंवार बणाया इस्या इस्या गाया जावै जका...