



ग्राम सेतु ब्यूरो.
भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध भवन एवं सन्निर्माण मजदूर संघ का एक दिवसीय जिला अधिवेशन 16 मई को हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित जाट भवन में आयोजित किया जाएगा। अधिवेशन की शुरुआत सुबह 9.30 बजे होगी। इसमें भवन एवं सन्निर्माण बोर्ड के सदस्य एवं भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरीशंकर व्यास विशेष रूप से शिरकत करेंगे।
संघ के जिलाध्यक्ष अनिल यादव अधिवेशन को सफल बनाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अधिवेशन केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भवन निर्माण से जुड़े हजारों मजदूरों के भविष्य को दिशा देने वाला मंच साबित होगा।
जिलाध्यक्ष अनिल यादव के अनुसार अधिवेशन में भवन निर्माण मजदूरों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर मंथन किया जाएगा। मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता से संबंधित मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इन प्रस्तावों को राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि श्रमिक हितों पर ठोस निर्णय लिए जा सकें। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन भवन निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
अधिवेशन में जिन मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा, उनमें शुभ शक्ति योजना को पुनः चालू करने और उसकी राशि में बढ़ोतरी शामिल है। यह योजना श्रमिक परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण रही है, और इसे बंद करना सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। इसके साथ ही छात्रवृत्ति योजना को पहली कक्षा से लागू करने की मांग की जाएगी, ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी श्रमिक का बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
संघ की मांग है कि आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में भवन निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए पृथक कोटा तय किया जाए, जिससे उन्हें भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर मिल सके। अधिवेशन में यह भी प्रस्ताव रखा जाएगा कि भवन निर्माण श्रमिक कार्ड धारकों को आयुष्मान भारत की दुर्घटना बीमा योजना में स्वतः शामिल किया जाए। दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता राशि सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रवासी मजदूर की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके परिवार को 15 लाख रुपये की तत्काल सहायता दिए जाने की मांग भी प्रमुख रहेगी।
जिलाध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि ये मांगें श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा सीधा सवाल हैं। राज्य और केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ चाहती है, इसलिए उम्मीद है कि इन मांगों को तुरंत स्वीकार कर लागू किया जाएगा।






