March 13, 2026

साहित्य

राजेश चड्ढ़ा.भारत सूफ़ी-संतां अते भगतां-कवियां दी धरती है। 16वीं सदी विच होए इक सूफ़ी-संत हज़रत शाह हुसैन...
मैं पृथ्वी हूंतुम्हारी जननीइसलिए तुमकहते होधरती मां।तुम चीरते होखोदते होमेरे बदन कोडालते हो तुमएक दानामैं देती हूंहजारों...
आर्किटेक्ट ओम बिश्नोई.देवव्रत और राघव बरसों बाद अपने दोस्त मेजर तुषार से मिलने पहुंचे हैं। उसकी छावनी...
एडवोकेट शंकर सोनी.एक दिन मैंने पोती से कहा-‘बेटा छन्नी देना।’ बच्ची मेरी तरफ देखने लगी। उसके लिए...
नरेश मेहन. गांव में सन्नाटाखेत उदास है।सरसों के फूलगुमसुम हैं।खेत की बाड़शान्त है।गाय खूंटे से बंधीरो रही...