September 27, 2026

साहित्य

रजनी शर्माजब कोई नवप्रवेशी बालकअपने नन्हे-नन्हे कदमों से विद्यालय के द्वार में प्रवेश करता है,तब उसे देखकर...
रंजना झा प्रेमरस संग बहे मलय समीर,चंचल चितवन करे मन अधीर। हरित अवनि, श्यामल अंबर,मुदित प्रकृति, पुलकित...
रजनी शर्माछत पर बैठी नन्ही गौरैया,इक दिन मुझसे यूं बोली,बदल गया है मानव अब तो,बदल गई दुनिया...
वेदव्यासजिस तरह बहता हुआ पानी और बोलता हुआ शब्द अपना रास्ता खुद बनाते हैं उसी तरह साहित्य...