August 13, 2026

साहित्य

मैं पृथ्वी हूंतुम्हारी जननीइसलिए तुमकहते होधरती मां।तुम चीरते होखोदते होमेरे बदन कोडालते हो तुमएक दानामैं देती हूंहजारों...
आर्किटेक्ट ओम बिश्नोई.देवव्रत और राघव बरसों बाद अपने दोस्त मेजर तुषार से मिलने पहुंचे हैं। उसकी छावनी...
एडवोकेट शंकर सोनी.एक दिन मैंने पोती से कहा-‘बेटा छन्नी देना।’ बच्ची मेरी तरफ देखने लगी। उसके लिए...
नरेश मेहन. गांव में सन्नाटाखेत उदास है।सरसों के फूलगुमसुम हैं।खेत की बाड़शान्त है।गाय खूंटे से बंधीरो रही...
वेदव्यास. मैं गांव-गांव का शिल्पकारमानव सपनों का सूत्रधारमैं करने आया आज सभी काखुशियों से अभिसार….मेरे गीतों में...