October 11, 2026

साहित्य

रजनी शर्मामाँ की कोख में पलता,एक नन्हा-सा उजाला हूँ मैं,पर जन्म से पहले ही,अंधेरों से घिर जाती...
तमन्ना गवाँचंद सिक्कों में मैंने माँ को घर चलाते देखा है,रहकर खुद भूखी, उसे दूसरों को खिलाते...
रजनी शर्माजब कोई नवप्रवेशी बालकअपने नन्हे-नन्हे कदमों से विद्यालय के द्वार में प्रवेश करता है,तब उसे देखकर...
रंजना झा प्रेमरस संग बहे मलय समीर,चंचल चितवन करे मन अधीर। हरित अवनि, श्यामल अंबर,मुदित प्रकृति, पुलकित...
रजनी शर्माछत पर बैठी नन्ही गौरैया,इक दिन मुझसे यूं बोली,बदल गया है मानव अब तो,बदल गई दुनिया...