रूंख भायला.राजी राखै रामजी ! पण आज रामजी बोल पड़्या-‘‘भाइड़ा, करम थारा, अर राजी राखूं म्हूं !...
हेत री हथाई
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! राजस्थानी रै जूनै साहित में सोरठो अेक चावी ठावी विधा है। इण बाबत...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! ‘हेत री हथाई’ में आज बात आपणी भासा री, आपणै सबदां री। बा...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी ! आज बात राजस्थानी में अलायदै ढंग सूं रचणियै कवि भूंगर री! हैं….भूंगर……कुण...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी ! आज बात प्रीत री, प्रीत री रीत री। हैं…..थारो मतलब ‘इलू इलू…’?...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! आज बात जैतल री! आपां लारली अेक हथाई में रातीजोगै री बात करी...
रूंख भायलाराजी राखै रामजी! आज बात बधावै रै गीतां री, आं गीतां रै मिस आपणै सैंस्कारां री,...
रूंख भायला. राजी राखै रामजी! आज बात पैरणै अर ओढणै री, मतलब गाभै लत्तै री, गाभा लत्ता,...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! दियाळी री रामा-श्यामा, मूंडो मीठो करो दाळ रै सीरै सूं ! ‘हैं….!!’ हैं...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! परबीती तो सदांई करां, आज कीं घरबीती। घरबीती कैवां तो बातां घरां री,...
