




रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! ल्यो भई, अबै राजस्थान में राजस्थानी नीं, मराठी चालसी। चालै क्यूं नीं, मराठी रै हेताळुवां रो राज है अबार। राज्यपाल हरि बागड़े राजस्थान री सगळी जगतपोसाळां में मराठी रा विभाग खोलणै रो आदेस दियो है। खोलो भई बेगा खोलो, कठैई चूक नीं रैय जावै राजस्थानी रा कंठ मोसण में…।
बागड़े साहब ! म्हूं मराठी में थान्नै कैवूं-
‘आमच्याकडे सगळे झोपले आहेत, तुला पटेल तसं कर !’ (म्हारै अठै सै सूता है, आपरै जचौ जियां करो।)
पण फरज करो, थे पंजाब का पछै दक्खण रै किणी राज्य में होवता अर इस्यो आदेस दे देवता तो अबार तंई कांई ठाह कित्ता फतवा जारी हो जावता। पंजाब में कोई बात तो कर’र देखै दिखाण मराठी थोपणै री…, आंख नीं करा देवै तो म्हनै कैय देया…दक्खण का बंगाल में तो लोग जीभ बाढ लेवै, पण खैर मनावो आप राजस्थान में हो। चोखी तरियां जाणो कै, ‘और कठैई पाल, राजस्थान चाल’। म्हारला नेतिया अर मंतरी तो चूं ई नीं करै, भलंई आप मराठी नै राजभासा बणाय देवो। बै तो मा बायरा टाबर है बापड़ा, भासा सारै के जाणै ! जे जाणता ई होवता, तो राजस्थानी आठवीं अनूसूची में नीं होवती। बै गैलसप्पा तो बात कर रैया है, तू उठा कै तू उठा, पण उठा’र मावड़ी नै कुण करै खड़ी…।
बागड़े साब, राजस्थानी में अेक कैबत है, खावै पीवै खसम रा, गीत गावै बीरै रा ! राजस्थान रो अन्न खाय’र आप मराठी रा गीत गावो, आ नाजोगी बात है। आप सूं तो उम्मीद आ ही कै आप राजस्थान प्रांत री भासा राजस्थानी नै राज भासा बणावणै रा आदेस देस्यो पण आप तो पोल देखतां ई आपरी रोट्यां हेठै खीरा देवण लाग्या। रोटी तो म्है भी खावां हा, सो कीं जाणां हां कै मराठी रा विभाग खोलण लारै आपरी मनस्या कांई है। मराठी भणावण सारू मराठी मानुस ई तो लावोला हर पोसाळ में…। चुपचपाता कित्तां नै रूजगार दे देस्यो, कित्तां रो हक मारस्यो म्हारै राजस्थान में, जद कै घर रा पूत कंवारा डोलै !
आप तो फगत मराठी रो आदेस काड्यो है, म्हूं तो कैवूं, आप स्पेनिश, इटालियन, अमेरिकन इंग्लिश, हिब्रू सणै तमिल तेलगू और थोप देवो, म्है सीखता रैयस्यां, जियां टूटी फूटी हिंदी अर अंग्रेजी सीखी है। थे के जाणो कै ओपरी भासा रै चक्कर में म्हारी तो आगली पीढी ई सेळ-भेळ होगी है, आज घड़ी म्हारै घर रा टाबर आपरी मा बोली नीं जाणै, इण सूं माड़ी बात और पछै कांई ! राजस्थान रो आम आदमी राजस्थानी बोलै, पण सरकारू दफतरां में, थाणा कचेड़ी में, मायड़ भासा बोलतां आपनै भोत हीणो मैसूस करै।
पण दोस थान्नै देवां ई क्यूं, म्है आप ई डोळबायरा मरां। इस्या ई म्हारा नेतिया है, पैंतीस धौळपोसिया सांसद है, दो सौ विधायक है जिका बातां तो करै बडी-बडी, पण बगत पड़्यां बाढी आंगळी टोपो ई नीं रेड़ै। बां रै कारणै ई राजस्थानी भासा नै संविधान मांय अजेस ठौड़ नीं मिल सकी है। जद कै दूजै प्रांतां रै लूंठै नेतावां डांग रै जोर सूं आपरी भासावां नै आठवीं अनुसूची मांय घलाय ली है। म्हारै नेतियां री तो जमां ई उत गयोड़ी है, जे बै चावै तो राजस्थानी नै आपणै प्रदेस री राजभासा बणावतै बान्नै कुण रोकै ! जे कोई इक्को दुक्को बातड़ी करै तो बेटा पारटीबाजी रै चक्करां में उण नै जूं जित्तो ई नीं गिणै….बान्नै तो रबड़ रा बोबा देवणा….कदेई हाथ आळा तो कदेई फूलआळा….।
बां नेतियां सूं कैवूं, अरे गैलसप्पो, चिड़ी, कबूतर कागलां सूं लगा’र सै जीव जिनावर आपरी भासा बोलै, फेर मरूभौम रै मानवी साथै ओ अन्याव क्यूं ? क्यूं थे कैवता कुहाइजता लोग आपरी भासा रै माण सारू हाको नीं करो ? क्यूं राज सामीं जाय’र पग रोप’र नीं कैवो-‘पैली भासा, पछै दूजा सगळा रासा’ ? देख्या कठैई थारै मांयलो लोई धौळो तो कोनी होग्यो ? अरे राज रा धणियों, आपरै चूंठिया बोड’र देखो दिखाण…थे जीवो तो हो के….कठैई मर तो नीं गया ?
थारा डोळ देख’र ई कदास गिरधारी सिंह पड़िहार लिख्यो होवैला-
सीख खड्यां ही सांझ, मोथा मिल्या मिलायदी
बजी मावड़ी बंाझ, फरजन्द मूंछ्यांळा फिरै
हक भू भासा हाण, जनखां री जामण झूरै
अणहूतो अणमाप, क्यूं जीवो रे कायरां !
तो आपां जनता जनार्दन के करां ?
हाको करो, डोळ सारू सगळा खेचळ खावो। खेचळ नीं खाइजै तो आपरै विधायकां रा, सांसदां रा कान खावो, बां नै फोन करो, ज्ञापन देवो, धरणा देवो, लोकराज रा अे ई तो हथियार है कै धूड़ खाय’र राज नै आपरी बात सुणनी पड़ैला। नीं सुणै तो वोट री चोट खातर आंगळी त्यार राखो। आज री हथाई रो सार इत्तो ई है कै-
आ रे साथी जतन करां ओ फसग्यो देस लफंगा में
अे काळै मूं रा धौळपोसिया हाथ गिचोळै गंगा में
बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार व लब्धप्रतिष्ठ शिक्षाविद् हैं








