




डॉ. हरिताशा चौधरी
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनके बारे में खुलकर बात नहीं की जाती। योनि से सफेद पानी आना भी उनमें से एक है। कई महिलाएं इसे लेकर घबराती हैं, जबकि कुछ इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। सच यह है कि हर सफेद स्राव बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में यह संक्रमण या अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए सही जानकारी होना बहुत जरूरी है।
महिलाओं में योनि से सफेद या हल्का पारदर्शी स्राव आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। मासिक धर्म के पहले या बाद में, अंडोत्सर्जन के समय और गर्भावस्था के दौरान इसकी मात्रा कुछ बढ़ सकती है। यदि स्राव में बदबू नहीं है, खुजली या जलन नहीं हो रही है और कोई दर्द नहीं है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती।
समस्या तब शुरू होती है जब सफेद पानी के साथ बदबू, खुजली, जलन, पेशाब के दौरान परेशानी, पेट के निचले हिस्से में दर्द या संभोग के समय दर्द होने लगे। ऐसे लक्षण किसी संक्रमण या अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
सफेद पानी आने के कई कारण हो सकते हैं। फंगल संक्रमण एक आम कारण है, जिसमें सफेद गाढ़ा स्राव और तेज खुजली हो सकती है। कुछ जीवाणु संक्रमणों में पतला स्राव और दुर्गंध महसूस हो सकती है। इसके अलावा यौन संपर्क से फैलने वाले कुछ संक्रमण भी असामान्य स्राव का कारण बन सकते हैं।
स्वच्छता की कमी भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकती है। मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखना, लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना या व्यक्तिगत स्वच्छता में लापरवाही संक्रमण को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि यह समझना भी जरूरी है कि हर सफेद पानी का कारण गंदगी नहीं होता। कई महिलाएं अधिक सफाई के नाम पर योनि के अंदर बार-बार साबुन या रासायनिक पदार्थों का उपयोग करती हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
कई बार संक्रमण केवल योनि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऊपर की ओर फैलकर गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के अंगों तक पहुंच जाता है। इस स्थिति को पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज कहा जाता है। यदि इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह भविष्य में संतान प्राप्ति में कठिनाई, बार-बार पेट दर्द और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज विशेष रूप से प्रजनन आयु की महिलाओं में अधिक देखी जाती है। कुछ यौन संक्रमण इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
इस समस्या से बचाव के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें, मासिक धर्म के दौरान नियमित रूप से पैड बदलें और बाहरी जननांगों को साफ एवं सूखा रखें। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दवाएं लेने से बचें। सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना भी संक्रमण से बचाव में मदद करता है।
यदि किसी महिला को लगातार बदबूदार स्राव, खुजली, जलन, बुखार, पेट दर्द या असामान्य रक्तस्राव की शिकायत हो, तो उसे तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आवश्यकतानुसार जांच करके सही कारण का पता लगाते हैं और उसी के अनुसार उपचार शुरू करते हैं।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि हर सफेद पानी के लिए एक जैसी दवा नहीं होती। सही इलाज तभी संभव है जब बीमारी के कारण की सही पहचान हो। विशेष रूप से पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी स्थितियों में इलाज में देरी भविष्य में गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को शर्म या संकोच के कारण छिपाना नहीं चाहिए। सफेद स्राव सामान्य भी हो सकता है और बीमारी का संकेत भी। इसलिए लक्षणों को समझना, समय पर जांच करवाना और उचित इलाज लेना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है। सही जानकारी और जागरूकता से अधिकांश समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।
-लेखक एमएस, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, जश्मीरा हॉस्पिटल वीएम गर्ल्स स्कूल के सामने हनुमानगढ़ टाउन की संचालक हैं









