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समाजसेवा, परोपकार और शिक्षा के क्षेत्र में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले प्रख्यात समाजसेवी दिवंगत लाला बनारसीदास अग्रवाल की जयंती एवं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर हनुमानगढ़ जंक्शन में व्यापक सेवा कार्य का आयोजन किया गया। इस विशेष स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में लाला बनारसीदास अग्रवाल चौरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सूरतगढ़ रोड स्थित ट्रस्ट द्वारा संचालित स्थायी प्याऊ परिसर में विशाल छबील लगाई गई। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारियों और परिजनों ने स्वयं उपस्थित रहकर हजारों नागरिकों को शीतल व मीठा जल पिलाया।
सेवा के इस पुनीत कार्य में एडवोकेट ओमप्रकाश अग्रवाल, एडवोकेट रोहित अग्रवाल, दर्शना अग्रवाल, यशिका अग्रवाल तथा सुनील बंसल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों व समाजसेवियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सुबह से शुरू हुआ यह सेवा कार्य शाम तक अनवरत जारी रहा, जहां विभिन्न मार्गों से गुजरने वाले आमजन, वाहन चालकों और पैदल यात्रियों ने जल ग्रहण कर तृप्ति का अनुभव किया।
इस अवसर पर ट्रस्ट के प्रतिनिधि एडवोकेट रोहित अग्रवाल ने दिवंगत लाला बनारसीदास अग्रवाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लालाजी का पूरा जीवन वास्तव में ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ के आदर्श पर आधारित था। वे ताउम्र समाज के प्रत्येक वर्ग की भलाई और उत्थान के कार्यों में जुटे रहे। उनका मानना था कि किसी भी व्यक्ति का असली मूल्य इस बात में है कि वह अपने समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर जाता है।
एडवोकेट रोहित अग्रवाल ने कहा, ‘लालाजी भौतिक सुख-सुविधाओं से परे रहकर सदैव जरूरतमंदों के आंसू पोंछने और सामाजिक चेतना जगाने में विश्वास रखते थे। उनके निधन के उपरांत ट्रस्ट और परिवार के सभी सदस्यों ने उनके द्वारा स्थापित किए गए उच्च जीवन मूल्यों और सेवा पथ पर चलने का अटूट संकल्प लिया है। हमारी निरंतर यही कोशिश है कि हम उनके आदर्शों को अक्षरशः अपने आचरण और समाजसेवा में ढाल सकें।’
स्वर्गीय लाला बनारसीदास अग्रवाल ने उस दौर में बालिका और नारी शिक्षा की पुरजोर वकालत की थी, जब समाज में महिला शिक्षा को लेकर संकीर्ण सोच हावी थी। उन्होंने बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए न केवल जागरूकता अभियान चलाए, बल्कि क्षेत्र में स्कूल और कॉलेजों की स्थापना के प्रयासों में भी निर्णायक भूमिका निभाई। उनके अथक प्रयासों से इलाके में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत आधार मिला, जिसका लाभ आज हजारों विद्यार्थियों को मिल रहा है।
इसके साथ ही, हनुमानगढ़ को स्वतंत्र जिला बनाने के ऐतिहासिक आंदोलन में भी लालाजी का योगदान अविस्मरणीय रहा। बतौर पार्षद क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए चले इस संघर्ष में वे अग्रणी पंक्ति में खड़े रहे और जनआंदोलन को संगठनात्मक शक्ति प्रदान की। वे सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और फिजूलखर्ची के सख्त विरोधी थे तथा सादगीपूर्ण जीवनशैली के प्रबल समर्थक रहे।
उल्लेखनीय है कि लाला बनारसीदास अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए निरंतर जनहित के कार्यों में जुटा हुआ है। ट्रस्ट द्वारा जरूरतमंद छात्राओं की शिक्षा में सहायता और प्रोत्साहन, शिक्षा, खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले होनहार युवाओं को प्रोत्साहित करना, ग्रीष्मकाल में स्थायी प्याऊ व छबील संचालन, असहायों की मदद और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का निरंतर आयोजन आदि प्रमुख है।






