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राजनीति में समाज की समस्याओं को समझना, महिलाओं का सम्मान करना और लोगों से सीधा संवाद बनाना असली नेता की पहचान है। इसी सोच के साथ इंडियन स्कूल ऑफ डेमोक्रेसी की तरफ से नई दिल्ली में चलाए जा रहे आवासीय कार्यक्रम ‘द गुड पॉलिटिशियन’ का दूसरा दिन बेहद खास और हलचल भरा रहा। दिनभर चले अलग-अलग सत्रों में कहीं कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई, तो कहीं सेवा, इतिहास और डिजिटल दौर की राजनीति के गुर सिखाए गए।
कार्यक्रम के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पॉश एक्ट) पर आधारित एक प्रभावशाली नाटक रहा। मंचन के माध्यम से यह दिखाया गया कि दफ्तर, स्कूल, कॉलेज या किसी भी अन्य संस्थान में उत्पीड़न को कैसे रोका जा सकता है। अगर किसी के साथ ऐसा गलत व्यवहार होता है, तो उसकी सही जगह शिकायत कैसे दर्ज कराई जाए और काम करने की जगह को कैसे महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जाए, इस पर विस्तार से संवाद हुआ।
राजस्थान के हनुमानगढ़ से भाग ले रहे अश्विनी पारीक ने इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पॉश नीति सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि हर संस्थान के व्यवहार में दिखनी चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि कार्यक्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई काम या व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिससे उसकी किसी महिला सहकर्मी को असहजता या असुरक्षा महसूस हो। उन्होंने कहा कि एक बेहतर और संवेदनशील कार्यसंस्कृति बनाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
दिन की शुरुआत सेवा भाव और श्रमदान के साथ हुई। सुबह के वक्त सभी प्रतिभागियों ने मिलकर एक अनाथालय के जरूरतमंद बच्चों के कपड़ों की सिलाई की। इस अनुभव को साझा करते हुए अश्विनी पारीक ने एक गहरी बात कही। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ कपड़ों की सिलाई नहीं थी, बल्कि जिंदगी का एक बड़ा सबक था। जिस तरह फटे या टूटे कपड़ों को जोड़ने के लिए सुई-धागे से लगातार अभ्यास और धैर्य की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही समाज और रिश्तों में आई किसी भी दूरी या बिखराव को पाटने के लिए लगातार और गंभीर कोशिशों की दरकार होती है।
दोपहर के सत्र में प्रतिभागियों को दिल्ली की मशहूर ‘सुंदर नर्सरी’ का भ्रमण कराया गया। हरियाली और ऐतिहासिक इमारतों के बीच बिताए इस वक्त को लेकर कांग्रेस नेत्री पुष्पा पारीक ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सभी को दिल्ली के समृद्ध और गौरवशाली इतिहास को करीब से जानने-समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि राजनीति में काम करने वाले लोगों को अपने देश और संस्कृति की जड़ों से जुड़ा होना बेहद जरूरी है।
दिन के आखिरी हिस्से में एक विशेष वक्ता सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रुचिरा चतुर्वेदी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेत्री चारु प्रज्ञा शामिल हुईं। दोनों प्रवक्ताओं ने राजनीति के व्यावहारिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा की।
कांग्रेस नेता रुचिरा चतुर्वेदी ने आज के दौर में कम्युनिकेशन और सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी कि सोशल मीडिया पर सिर्फ बड़े नेताओं से मिलने-जुलने और उनके साथ फोटो खिंचवाने की औपचारिकता से बचें। इसके बजाय जनता के बीच जाएं, उनके लिए किए जा रहे जमीनी कामों, उनकी समस्याओं के समाधान और जनसेवा से जुड़े वीडियो व फोटो साझा करें। उन्होंने कहा कि असली राजनीति वही है जो जनता से सीधे जुड़े। इसके अलावा उन्होंने देश की राजनीति और नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। पूरे दिन के आयोजनों ने भावी राजनेताओं को सेवा, संवेदनशीलता और संवाद की मजबूत सीख दी।







