



भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता जसप्रीत सिंह जेपी बिना राग लपेट के अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। भाजपा हनुमानगढ़ जिले का प्रवक्ता रह चुके जेपी के लिए ओबीसी मोर्चा का प्रदेश प्रवक्ता होना मायने रखता है। कुशल संगठक और पार्टी विचारधारा के प्रति समर्पित जसप्रीत सिंह जेपी ने ‘graamsetu.com’ से विभिन्न मसलों पर खुलकर बातचीत की। प्रस्तुत है संपादित अंश

ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में ओबीसी समाज की सबसे बड़ी समस्या क्या है और बीजेपी उसे कैसे देखती है?
-ओबीसी समाज बहुत बड़ा है। इसमें 90 जातियां आती हैं। अभी हम प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमावत जी के निर्देशानुसार समस्याओं का आकलन कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्षजी खुद कुछ अरसा पहले टिब्बी आए थे। समस्याओं को एकत्रित कर उसे उचित मंच पर रखा जाएगा। बीजेपी ही ओबीसी वर्ग की रक्षक है, यह बात जाहिर है।
सत्ता और संगठन में ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर आपकी पार्टी का रोडमैप क्या है?
-अभी आपने देखा कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही ओबीसी वर्ग से आते हैं। इससे अधिक ओबीसी वर्ग के लिए कौन सोचेगा। पार्टी ओबीसी वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित है।
जातिगत जनगणना पर आपकी स्पष्ट राय क्या है ?
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सबका साथ सबका विकास नारे को मूर्त रूप देने में जुटी है। जातिगत जनगणना जारी है। जनसंख्या के हिसाब से सबको आगे बढ़ने के लिए अवसर दिए जाएंगे।
ओबीसी में मूल ओबीसी का मसला विवाद पैदा करता है। इसका क्या हल है ?
-देखिए, यह उच्च स्तर का मसला है। पार्टी नेतृत्व के ध्यान में है। इसलिए मेरा कुछ भी कहना उचित नहीं रहेगा। मैं तो इतना सबमझता हूं कि मोदी है तो मुमकिन है, प्रत्येक कार्यकर्ता को यह मंत्र याद रखने की जरूरत है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की वजह से पंचायतीराज व शहरी निकाय चुनाव में देरी हो रही है। सरकार को क्या करना चाहिए कि चुनाव में और ज्यादा देरी न हो और ओबीसी समाज को भी दिक्कत न हो।
-राज्य सरकार अपने स्तर पर मुकम्मल प्रयास कर रही है। उम्मीद करनी चाहिए कि सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी और निर्धारित समय में चुनाव होंगे। भाजपा प्रचण्ड मतों के साथ पंचायतीराज और शहरी निकाय में अपना बोर्ड बनाएगी।








