



रूंख भायला.
राजी राखै रामजी ! पण आज रामजी बोल पड़्या-
‘‘भाइड़ा, करम थारा, अर राजी राखूं म्हूं ! आ कियां होवै ?’’
म्हारा तो कान खुस’र हाथ में आयग्या, आज परभु रै कांई होयो।
‘‘इयां कियां रामधणी ? म्हे तो आपरो नांव लेय’र ई काम सरू करां, म्हारै डोळ सारू आपरी ध्यावना ई करां, पण थे राजी राखणै सूं बेराजी क्यूं होया ?’’
‘‘थारा डोळ देख’र…..गैलसप्पो, कुदरत थान्नै सो कीं सूंप्यो है, पाणी री जिग्यां पाणी, हवा री जिग्यां हवा, धरती, जंगळ, दरखत, नदी, भाखर अर डूंगर, जीव जिनावर….कांई ठाह कित्तो-कित्तो…पण थे उण रो मोल ई नीं जाण्यो, सै धूड़ कर न्हाख्या…. जिकी चीजां थान्नै सूंपी, बां री कदर तो करो !’’
आज रामजी रिसाणा है, सागी मायतां दांई, म्हूं तो बोलोबालो सुणबो कर्यो।
‘‘डोफो, खुद नै राम भगत न्यारा बतावो पण राम तो थारो निकळ्योड़ो है….!’’
‘‘परभुजी, मोरे अवगुन चित ना धरो…!’’ म्हूं लपोसा लगा’र बूझ्यो, ‘‘हे म्हारा रामधणी, आज रीसां में क्यूं हो ? कीं तो बतावो ?’’
‘‘रीस मन्नै नंई, थान्नै आवणी चाइजै ! म्हूं चेतावूं उण सूं पैलां थान्नै चेतणो चाइजै !!’’ रामजी तो इतरो कैय’र अंतरधान होग्या। म्हानै लखायो, रामजी तंई ‘आड़ावळ’ नै जमींदोज करणै री चाल रा समचार पूगग्या है, पूगै क्यूं नीं, बै तो जाणीजाण है इण सिरिस्टी में घट रैयी हर बात रा…।
…..पछै कीं बात आपां भी कर लेवां। समचार ओ है कै आपणो आड़ावळ जिण नै अरावली कैय’र बतळाइजै, उण पर गिद्ध निजरां लाग रैयी है। बिगसाव रै नांव माथै कीं लालची लोगां राज रै साथै रळ’र उण नै जमींदोज करणै री नवी चाल चाली है। आड़ावळ में सारो रोळो ‘माइनिंग’ रो है, लोगड़ा दुनिया रै इण सैं सूं जूनै भाखर री खुदाई कर भाठो काडणो चावै। काड तो बरसां सूं रैया है, पण अबै लालच अणूतो बधग्यो। पर्यावरण संकट नै लेय’ देस री मोटोड़ी कचेड़ी में अेक सुणवाई चालै, आड़ावळ रै इलाकै में माइनिंग री…, देस रै राज कचेड़ी में अेक अरजी लगाई कै सौ मीटर सूं नीचौ भाखर नै आड़ावळ री परिभासा सूं बारै राख्यो जावै। मजै री बात मोटोड़ी कचेड़ी राज री उण बात नै मान लियो अर आदेस जारी कर दियो, ‘‘अरावली क्षेत्र में 100 मीटर से कम उंचाई के पहाड़ अरावली की परिभाषा में शामिल नहीं होंगे।’’
भोळा स्याणो, कदेई कुदरत री मिणत होया करै ! डूंगर भाखर तो कुदरत री सैं सूं मोटी नेमत है आदमी सारू। फेर आड़ावळ तो आपणी पिछाण है, बो फगत अेक पहाड़ कोनी, पहाड़ां री मोटी लैण है जिकी गुजरात सूं लगाय’र दिल्ली अर हरियाणा तंई पसरी है। आपणै राजस्थान में तो आड़ावळ सैं सूं लाम्बो है, जिको थळवट नै आगै पसरणै सूं रोकै। सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़, राजसममंद, पाली, अजमेर, जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, सीकर अर झुंझनू जिलां में पसरेड़ै इण आड़ावळ में आपणै पुरखां री पिछाण बसै, अेक-अेक भाठै में अेकलिंग रो वास है, रजपूती गुमेज है, भीलां रो त्याग है, मिनख रो सत है। मरूधरा री रीतां अर गीतां में आड़ावळ गाइजै, उण रो बखाण होवै पण आज मिनख रै लालची सुभाव उण माथै संकट खड़्यो कर दियो है। जिको असाध्य है उण नै साधणै री बात हो रैयी है, आ भोत नाजोगी बात है।
और तो और, राज रा मंतरी बडी ढिठाई सूं कैय रैया है, म्है आडावळ रा रूखाळा हां। बां रै मुजब आड़ावळ रै घणकरै हिस्सै नै कोई छेड़ ई नीं सकै, क्यूं कै बठै ‘रिजर्व फॉरेस्ट’ है। फगत एक दो प्रतिषत हिस्सै माथै ई नवा काण कायदा लागू होसी, अर बै ई अजेस बण्या कोनी, बणाइजसी।
मंतरीजी बडी चतराई सूं जनता नै एक दो प्रतिषत री बात बतावै, पण ओ नीं बतावै कै आड़ावळ इत्तो बडो है कै उण रै अेक प्रतिषत में ही हजारूं बीघा जमीन है जिण में बै माइनिंग री छूट देय’र कुदरती नेम कायदां नै तोड़नो चावै। इण बात सूं कुण नटै, बिगसाव सारू माइनिंग जरूर है, पण उण माइनिंग पर कॉरपोरेट रो नीं, आड़ावळ रै मूळ बासिंदै रो पैलो हक होवणो चाइजै। अबार घणकरी छोटी मोटी पहाड़्यां पर बरसां पुराणै नेम कायदां सूं माइनिंग चलै, पण आप ओ हक राज आपरै हिमायत्यां दै दिरावणो चावै, अे बातां सब रै समझ आवै। बात तो आ भी है कै ओल्लै छान्नै, चोरी सूं ई घणी माइनिंग हो रैयी है, उण री कित्ती’क रूखाळ करी है राज ! माइनिंग रा मोटा ठेका तो आज भी मंतरी संतरी लेय बैठ्या है, पछै किसी रूखाळ !!
कुदरत आपणी जरूरतां तो पूरी कर सकै पण आपणै लालच नै कद पूरी आवै ! जे कुदरत आपरी करणी पर आई तो आपां रो ठाह ई नीं लागैला। आज आखै राजस्थान में आड़ावळ रै पख में आवाज उठ रैयी है, राज रो धरम है कै उण बात नै सुणै। नीं पछै रामजी रूस जावैला, अर रामजी रूसै तो पछै सहाय ई कुण करै !!
आज री हथाई रो सार ओ है कै आड़ावळ सूं छेड़छाड़ री हर बात रो आप नै विरोध करणो चाइजै। लोकराज में आपणी पंचायत सारू आपां जिण लोगां नै स्याणां कर संसद अर विधानसभा में भेजां, बां रा कान खांचणा चाइजै, बान्नै चेताणो चाइजै, कै राज ओ गैलापणो नीं करै, नीं पछै आड़ावळ तो बचौला का नीं, थारो ठाह ई नीं लागैला !
बाकी बातां आगली हथाई में…..। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेखक राजस्थानी और हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं




