





ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ टाउन स्थित राजवी पैलेस के विशाल सभागार में एक अलग ही दृश्य था। कुर्सियों पर बैठे लोग और सामने मंच पर बैठे देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक। यह कोई औपचारिक सेमिनार नहीं, बल्कि सेहत पर खुली बातचीत का जीवंत मंच था। आरएसएसडीआई राजस्थान चैप्टर के 13वें वार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन आरएसएसडीआई-26 के दूसरे दिन आमजन में डायबिटीज को लेकर फैली भ्रांतियों को तोड़ने के लिए ‘रोगी-परिजन एवं चिकित्सक संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माहौल में न झिझक थी, न डर। सिर्फ सवाल थे, और उन्हें समझने की ईमानदार कोशिश।
इस संवाद कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि चिकित्सक मंच से उपदेश नहीं दे रहे थे, बल्कि आम लोगों की भाषा में, उनकी उलझनों को सुन और समझ रहे थे। कार्यक्रम में डॉ. अतुल घीगड़ा, जयपुर से आए डॉ. मयंक गुप्ता, डॉ. पारस जैन सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मंचासीन अतिथियों में एपेक्स क्लब के उपाध्यक्ष राजेंद्र बैद, डॉ. प्रदीप सहारण, महिला विंग से रेणु सौंधी, डॉ. नीलम गौड़ तथा सहयोग शक्ति फाउंडेशन से प्रेरणा पाहुजा शामिल रहे। यह सहभागिता साफ संकेत दे रही थी कि डायबिटीज केवल चिकित्सा का विषय नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
संवाद कार्यक्रम में 250 से अधिक शहरवासियों ने उपस्थिति दर्ज करवाई। किसी ने पूछा-दिन में कितनी बार खाना चाहिए? किसी ने फल को लेकर भ्रम जताया, केला खाएं या नहीं? तो किसी ने दवाइयों में बदलाव और वजन घटने-बढ़ने की स्थिति पर सवाल रखे। सबसे अहम बात यह रही कि मरीज और उनके परिजन बिना संकोच अपने अनुभव और आशंकाएं साझा कर रहे थे। यह वही सवाल थे जो अक्सर घरों में मन के भीतर दबे रह जाते हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी प्रश्नों को गंभीरता से सुना और सरल भाषा में समाधान दिए। उन्होंने बताया कि डायबिटीज मुख्यतः दो प्रकार की होती है, टाइप-1 और टाइप-2 के। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, थकान, वजन में अचानक कमी या बढ़ोतरी शामिल हैं। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि असंतुलित जीवनशैली, मोटापा, तनाव और आनुवांशिक कारण मधुमेह के प्रमुख कारक हैं। यानी यह बीमारी अचानक नहीं आती, बल्कि आदतों के रास्ते चुपचाप घर में दाखिल होती है।
विशेषज्ञों ने वैश्विक परिदृश्य पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्व में मधुमेह के मामलों में चीन पहले स्थान पर है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर। जिस तेजी से देश में यह बीमारी बढ़ रही है, अनुमान है कि वर्ष 2040 तक भारत पहले स्थान पर पहुंच सकता है। यह आंकड़ा सुनकर हॉल में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, क्योंकि यह भविष्य की नहीं, वर्तमान की चेतावनी थी।
कार्यक्रम के दौरान रिलाइबल लैब की ओर से प्रतिभागियों के लिए ब्लड टेस्ट, शुगर और बीपी की निशुल्क जांच की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने इसका लाभ उठाया। कई ऐसे चेहरे भी दिखे जिन्हें पहली बार पता चला कि उनका शुगर स्तर सामान्य से ऊपर है। यहीं पर विशेषज्ञों ने समझाया कि समय पर जांच ही सबसे सस्ती और सबसे कारगर दवा है।
डॉ. एसएस गेट ने बताया कि इस तरह के संवाद कार्यक्रम मरीजों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और समाज में जागरूकता बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनते हैं। डायबिटीज लाइलाज नहीं, बल्कि नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। सही जानकारी, नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह से इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
आरएसएसडीआई-26 के इस नवाचार ने यह साबित कर दिया कि जब ज्ञान सीधे लोगों तक पहुंचता है, तो डर खुद-ब-खुद पीछे हट जाता है। राजवी पैलेस में हुआ यह संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेहत के प्रति सोच बदलने की शुरुआत था, जिसे शहरवासियों ने खुले दिल से सराहा और बेहद उपयोगी बताया।






