


ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। अब हर सरकारी स्कूल की दीवार पर वहां कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की फोटो सहित पूरी जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इससे स्कूलों में काम करने वाले स्टाफ की असली स्थिति साफ नजर आएगी और अभिभावकों के लिए जानकारी हासिल करना आसान हो जाएगा।
राज्य के प्रारम्भिक शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों का फोटो सहित पूरा विवरण स्कूल की दीवार पर लगाने का निर्देश जारी किया है। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में राज्य के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।
इन निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक सरकारी स्कूल में ‘हमारे शिक्षक-कार्मिक’ शीर्षक के साथ एक सूचना पट्ट लगाया जाएगा। इस पट्ट पर स्कूल का नाम, शिक्षक और कर्मचारी का फोटो, नाम, एम्पलाई आई-डी, जन्म तिथि, शैक्षणिक योग्यता, पद, विषय तथा अन्य शैक्षणिक जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी। यह जानकारी स्कूल के ऐसे स्थान पर लगाई जाएगी जहां आने वाले लोगों की नज़र आसानी से पड़ सके।
माना जा रहा है कि इस व्यवस्था का मकसद स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। इससे अभिभावकों, विद्यार्थियों और स्कूल आने वाले अन्य लोगों को स्टाफ की पूरी और प्रमाणिक जानकारी एक ही जगह पर मिल सकेगी। पहले ऐसी जानकारी लेने के लिए प्रिंसिपल या कर्मचारियों से पूछताछ करनी पड़ती थी, जिससे कई बार उलझन और गफलत की स्थिति बन जाती थी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कदम से स्कूलों में स्वीकृत पदों, कार्यरत शिक्षकों और रिक्त पदों की स्थिति भी साफ तौर पर सामने आ सकेगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी स्कूल में स्टाफ की कितनी कमी है और प्रशासन को कहां व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। विभाग ने यह भी साफ किया है कि जब शिक्षा अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे तो इसी जानकारी के आधार पर स्टाफ की वास्तविक मौजूदगी का सत्यापन करेंगे। यदि किसी स्कूल में यह जानकारी प्रदर्शित नहीं मिली तो उस स्कूल की रिपोर्ट में निगेटिव मार्किंग दर्ज की जाएगी।
शिक्षक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम सरकारी स्कूलों की साख और भरोसे को मजबूत करेगा। कई बार सूचना पट्ट धुंधले पड़ जाते हैं या ऐसी जगह लगे होते हैं जहां किसी की नजर नहीं जाती। नई व्यवस्था में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जानकारी सार्वजनिक और साफ नजर आने वाली जगह पर ही लगाई जाए।
सूत्रों के मुताबिक, अभी बोर्ड और अन्य परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए सभी स्कूलों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। कुछ स्कूलों में सूचना पट्ट लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही सभी सरकारी स्कूलों में इसे अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से स्कूलों में जवाबदेही का माहौल बनेगा और शिक्षा व्यवस्था में भरोसे की एक नई रौशनी दिखाई देगी। जब जानकारी खुलकर सामने होगी तो न सिर्फ निगरानी आसान होगी बल्कि स्कूलों की कार्यप्रणाली में भी सुधार आने की उम्मीद है।







