




ग्राम सेतु ब्यूरो.
रात करीब साढ़े आठ बजे का समय। हनुमानगढ़ जिले के पास स्थित गांव रोडांवाली का पंचायत घर हल्की रोशनी में जगमगा रहा था। बाहर खड़ी गाड़ियों और भीतर जुटती भीड़ से साफ लग रहा था कि गांव में कुछ अलग होने वाला है। आमतौर पर पुलिस की गाड़ी गांव में पहुंचे तो लोग दूरी बना लेते हैं, लेकिन बीती रात माहौल अलग था। यहां ‘दबिश’ नहीं, ‘संवाद’ होने वाला था। हनुमानगढ़ पुलिस की नई पहल के तहत पहली ‘रात्रि चौपाल’ सज चुकी थी।
पंचायत घर के बरामदे में कुर्सियों से ज्यादा चारपाइयां और प्लास्टिक की कुर्सियां नजर आ रही थीं। गांव के बुजुर्ग साफा बांधे धीरे-धीरे पहुंच रहे थे। कुछ युवा मोबाइल पर वीडियो बना रहे थे। महिलाएं भी थोड़ी दूरी पर खड़ी होकर माहौल को परख रही थीं। तभी ‘आप बोलिए, पुलिस सिर्फ सुनने आई है’, चारपाई पर बैठकर क्यों बोले एसपी नरेंद्र सिंह मीना ?
सीओ सिटी मीनाक्षी और जंक्शन थाना प्रभारी रामचंद्र कसवां पंचायत घर में पहुंचे। खाकी वर्दी जरूर थी, लेकिन अंदाज औपचारिक कम और अपनापन ज्यादा लिए हुए था।
शुरुआत में गांव वाले चुप रहे। जैसे हर कोई दूसरे का इंतजार कर रहा हो कि पहले कौन बोले। एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘आज आप बोलिए, पुलिस सिर्फ सुनने आई है।’ बस, यहीं से माहौल बदलने लगा। धीरे-धीरे गांव की आवाजें खुलने लगीं।
सबसे पहले गांव के बुजुर्गों ने एक ऐसी बात कही, जिसने चौपाल का माहौल सकारात्मक बना दिया। उन्होंने बताया कि रोडांवाली में हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय वर्षों से भाईचारे के साथ रहते आए हैं। गांव में कभी सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति नहीं बनी। पुलिस अधिकारियों ने भी इस सामाजिक सौहार्द की सराहना की। कुछ देर के लिए चौपाल गांव की एकता का मंच बन गई।
फिर चर्चा गांव की समस्याओं पर आ गई। युवाओं और अभिभावकों ने स्कूल मैदान में असामाजिक तत्वों के जमावड़े की शिकायत की। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि रात होते ही बुलेट मोटरसाइकिलों से पटाखों जैसी आवाज निकालकर युवक हुड़दंग करते हैं। गांव के बुजुर्गों ने इसे ‘फैशन नहीं, परेशानी’ बताया। शिकायत सुनते ही एसपी ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों की नोटबुक में बातें दर्ज होती रहीं और ग्रामीणों को पहली बार लगा कि उनकी बात सिर्फ सुनी नहीं जा रही, बल्कि लिखी भी जा रही है।
चौपाल का सबसे गंभीर हिस्सा तब आया जब नशे की चर्चा शुरू हुई। एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने साफ शब्दों में कहा कि नशा गांवों को भीतर से खोखला कर रहा है। उन्होंने पुलिस की ओर से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी और व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 8764531201 साझा करते हुए भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह सुनते ही कई ग्रामीण एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। मानो गांव के भीतर दबे हुए कई राज अचानक हवा में तैरने लगे हों।
इस दौरान सरपंच इसमा बीवी, पूर्व सरपंच नूर नबी भाटी, नरेंद्र डोटासरा, विद्यालय प्रिंसिपल राजाराम भाटिया, पूर्व जिला परिषद सदस्य, वार्ड पंच और पटवारी भी मौजूद रहे। पंचायत घर में कोई मंचीय दूरी नहीं थी। पुलिस अधिकारी और ग्रामीण लगभग साथ बैठकर बात कर रहे थे। यही इस चौपाल की सबसे अलग तस्वीर थी।
बीट अधिकारी एएसआई निकूराम और कांस्टेबल जीतराम भी पूरे समय गांव वालों के बीच सक्रिय रहे। कई ग्रामीणों ने बाद में कहा कि आम दिनों में थाने जाने में झिझक होती है, लेकिन जब पुलिस खुद गांव में आकर बात करती है तो डर कम हो जाता है।
रोडांवाली की यह चौपाल सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं लगी। यह गांव और पुलिस के बीच की उस दूरी को कम करने की कोशिश नजर आई, जो अक्सर शिकायत, डर और अविश्वास के कारण बढ़ जाती है। रात गहराने लगी थी, लेकिन पंचायत घर में बातचीत का सिलसिला जारी था। चौपाल खत्म होने के बाद भी लोग छोटे-छोटे समूहों में पुलिस अधिकारियों से अलग-अलग बात करते दिखाई दिए।
रोडांवाली के बाद तलवाड़ा, अनूपशहर और खरलिया गांवों में भी इसी तरह के पुलिस-पब्लिक संवाद आयोजित किए गए। लेकिन पहली चौपाल की बात अलग रही। गांव वालों के चेहरों पर जाते-जाते एक भाव साफ दिखाई दे रहा था, खाकी अगर सुनने लगे, तो शिकायत आधी वहीं खत्म हो जाती है।





