




ग्राम सेतु ब्यूरो.
पंचायत राज और नगर निकाय चुनावों से पहले कराए जा रहे ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व सर्वे में हनुमानगढ़ जिला राज्य के औसत से पीछे चल रहा है। सर्वे पूरा करने की अंतिम तिथि अब 26 जुलाई है, लेकिन जिले में अभी भी करीब 35 प्रतिशत काम बाकी है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि महज दो दिनों में शेष हजारों परिवारों तक पहुंचकर सर्वे कैसे पूरा किया जाएगा।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार हनुमानगढ़ जिले में अनुमानित 2,22,678 ओबीसी परिवार हैं। इनमें से 23 जुलाई तक 1,43,544 परिवारों का ही सर्वे पूरा हो सका है। इसमें 1,23,708 ग्रामीण और 19,836 शहरी परिवार शामिल हैं। इस प्रकार जिले में अब तक 64.46 प्रतिशत सर्वे ही पूरा हुआ है, जबकि लगभग 79 हजार परिवारों का सर्वे अभी शेष है।
प्रदेश स्तर पर 23 जुलाई तक 69.86 प्रतिशत सर्वे पूरा हो चुका है। इस लिहाज से हनुमानगढ़ राज्य के औसत से भी पीछे है। पड़ोसी जिलों में श्रीगंगानगर ने 72.84 प्रतिशत और बीकानेर ने 68.49 प्रतिशत सर्वे पूरा कर लिया है, जबकि चूरू 61.75 प्रतिशत के साथ हनुमानगढ़ से पीछे है। राज्य में सबसे तेज प्रगति बाड़मेर और सलूंबर जिलों में दर्ज की गई है, जबकि कोटा और बारां सबसे धीमे जिलों में शामिल हैं।
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने पहले सर्वे की अंतिम तिथि 23 जुलाई निर्धारित की थी, लेकिन कई जिलों में धीमी प्रगति को देखते हुए इसे बढ़ाकर 26 जुलाई कर दिया गया। आयोग को 5 अगस्त तक राज्य सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत समितियों, जिला परिषदों और नगर निकायों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया संपन्न होगी।
हनुमानगढ़ जिले में लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रशासन ने सर्वे टीमों की संख्या बढ़ाने और कार्य में तेजी लाने का दावा किया है। जिला प्रशासन के निर्देशन में बूथ लेवल अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी और शिक्षकों को प्रगणक बनाकर घर-घर सर्वे कराया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक की प्रगति यह संकेत दे रही है कि अंतिम दो दिनों में सामान्य गति से कई गुना अधिक काम करना होगा।
यह सर्वे पूरी तरह तकनीक आधारित है। राजसाथी मोबाइल ऐप के माध्यम से परिवारों का विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। जनआधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों के आधार पर प्रत्येक परिवार का सत्यापन किया जा रहा है। डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी अपलोड की गई जानकारी की रैंडम जांच भी कर रहे हैं।
सर्वे के दौरान परिवार के सभी सदस्यों का नाम, आयु, स्थायी पता, ओबीसी जाति या उपजाति, आय का स्रोत तथा परिवार का कोई सदस्य पंच, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, विधायक या सांसद जैसे निर्वाचित पद पर रहा है या नहीं, इसकी भी जानकारी दर्ज की जा रही है।
हनुमानगढ़ में अगले दो दिन इस सर्वे की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि सर्वे की रफ्तार नहीं बढ़ी तो निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि अतिरिक्त प्रयासों के जरिए शेष सर्वे समय पर पूरा कर आयोग को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। चुनावी आरक्षण की पूरी प्रक्रिया इसी सर्वे पर आधारित होने के कारण इसकी समयबद्धता और सटीकता दोनों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।








