




ग्राम सेतु डेस्क
बरसात के मौसम में नलों से गंदा और मटमैला पानी आना आम समस्या बन जाती है। हनुमानगढ़ जैसे क्षेत्रों में यह परेशानी और भी गंभीर है, जहां सालभर कई बार लोगों को साफ पेयजल नहीं मिल पाता। अधिकांश घरों में पीने के पानी के लिए आरओ या वॉटर प्यूरीफायर का उपयोग किया जाता है, लेकिन हर परिवार इसकी लागत वहन करने में सक्षम नहीं होता। ऐसे में दूषित पानी का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक भोजन के साथ शुद्ध पानी भी उतना ही जरूरी है। दूषित पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड, हैजा, पीलिया और पेट से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए यदि आरओ उपलब्ध नहीं है, तब भी कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर पानी को काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि मानव शरीर का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है। ऐसे में स्वच्छ पानी का सेवन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है। कम खर्च या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के भी पानी को शुद्ध किया जा सकता है।
यहां हम आपको पानी शुद्ध करने के पांच प्रभावी घरेलू तरीके बता रहे हैं।
पहला तरीका उबालना है। किसी बड़े बर्तन में पानी को कम से कम पांच मिनट तक अच्छी तरह उबालें। इसके बाद पानी को स्वाभाविक रूप से ठंडा होने दें। उबालने से अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे पानी अपेक्षाकृत सुरक्षित हो जाता है।
दूसरा तरीका क्लोरीन की गोलियों का उपयोग है। निर्धारित मात्रा में क्लोरीन टैबलेट पानी में डालकर उसे कम से कम आधे घंटे तक छोड़ दें। इसके बाद ही पानी का उपयोग करें। यह तरीका आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में भी काफी उपयोगी माना जाता है।
तीसरा तरीका ब्लीच का उपयोग है। यदि बिना खुशबू और रंग वाला सोडियम हाइपोक्लोराइट युक्त ब्लीच उपलब्ध हो, तो पहले पानी को गर्म करें और फिर एक लीटर पानी में दो से तीन बूंद ब्लीच मिलाएं। कुछ समय बाद यह पानी उपयोग के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि इस विधि में मात्रा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
चौथा तरीका फिटकरी है। फिटकरी को साफ पानी से धोकर उसे पानी में कुछ देर तक घुमाएं। इससे पानी में मौजूद मिट्टी और अन्य अशुद्धियां नीचे बैठ जाती हैं। इसके बाद ऊपर का साफ पानी अलग करके उपयोग में लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि यह तरीका मुख्य रूप से पानी की गंदगी कम करने में मदद करता है।
पांचवां तरीका सेब और टमाटर के छिलकों का बताया गया है। विशेषज्ञ के अनुसार, इन छिलकों को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर पानी में डालने पर कुछ समय बाद पानी की शुद्धता में सुधार हो सकता है। हालांकि इस तरीके पर वैज्ञानिक अध्ययन सीमित हैं, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में उबालना, क्लोरीन या प्रमाणित जल शोधन विधियों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बरसात के मौसम में यदि नल का पानी मटमैला दिखाई दे तो उसे सीधे पीने से बचें। जहां संभव हो, पानी को उबालकर या प्रमाणित तरीके से शुद्ध करने के बाद ही उपयोग करें। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।







