





ग्राम सेतु ब्यूरो
बदलते मीडिया दौर में पत्रकारिता केवल समाचार लिखने या प्रसारित करने तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और मल्टीमीडिया कंटेंट के साथ समाज को दिशा देने वाला प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। इसी सोच के साथ श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय (एसकेडी विश्वविद्यालय), हनुमानगढ़ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित तृतीय बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक जीवंत शैक्षणिक विमर्श का साक्षी बनी। शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और विभागीय सदस्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पत्रकारिता शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने पर व्यापक चर्चा की। बैठक में विचारों का आदान-प्रदान, पाठ्यक्रम की समीक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं पर मंथन ने पूरे वातावरण को अकादमिक ऊर्जा से भर दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पाठ्यक्रम को बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप अद्यतन करना तथा विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना था, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की अपेक्षाओं पर खरे उतर सकें। इस दौरान पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधन, नए विषयों के समावेश, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, शोध गतिविधियों तथा उद्योग और शिक्षा जगत के बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अकादमिक एक्सटर्नल एक्सपर्ट डॉ. मिहिर रंजन पात्रा ने कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा जर्नलिज्म, मल्टीमीडिया पत्रकारिता और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीकों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता संस्थानों का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे दक्ष और जिम्मेदार मीडिया पेशेवर तैयार करना होना चाहिए जो बदलती तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर विकसित कर सकें।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज का आईना है और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट शिक्षा देकर संवेदनशील तथा उत्तरदायी पत्रकार तैयार करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष लवप्रीत सिंह ने विभाग की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि समय-समय पर पाठ्यक्रम की समीक्षा कर उसे मीडिया उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन किया जाता है। उन्होंने कहा कि विभाग विद्यार्थियों को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और न्यू मीडिया के साथ-साथ कंटेंट क्रिएशन, मीडिया प्रोडक्शन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग तथा जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी मनीष कौशिक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया जा रहा पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, आलोचनात्मक चिंतन और व्यावसायिक दक्षता का विकास करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें मीडिया उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।
बैठक के दौरान प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर बोर्ड ऑफ स्टडीज़ के सदस्यों ने विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया। बैठक में डॉ. बाबू लाल पारीक, विद्यार्थी प्रतिनिधि प्रेम आजाद सहित आंतरिक एवं बाह्य विशेषज्ञ सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पत्रकारिता का भविष्य केवल पारंपरिक रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, शोध, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के संतुलन में ही इसकी वास्तविक शक्ति निहित है। एसकेडी विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों को बदलते मीडिया जगत के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






