





ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजनीति में पहचान समाज के बीच निरंतर सक्रियता, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से बनती है। हनुमानगढ़ के कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष अश्विनी पारीक और उनकी धर्मपत्नी पुष्पा पारीक का देश के प्रतिष्ठित ‘द गुड पॉलिटिशियन प्रोग्राम-2026’ के लिए चयन इसी प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान माना जा रहा है। पति-पत्नी दोनों का एक साथ इस प्रतिष्ठित नेतृत्व विकास कार्यक्रम में चयन होना न केवल बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि हनुमानगढ़ की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता के लिए भी गौरव का विषय है।
इंडियन स्कूल ऑफ डेमोक्रेसी द्वारा संचालित यह कार्यक्रम देशभर के ऐसे चुनिंदा सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मंच प्रदान करता है, जिनमें भविष्य का जिम्मेदार, संवेदनशील और लोकतांत्रिक नेतृत्व विकसित करने की क्षमता दिखाई देती है। इस कार्यक्रम में चयन केवल राजनीतिक संबद्धता के आधार पर नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के सामाजिक योगदान, नेतृत्व क्षमता, सार्वजनिक जीवन में सक्रियता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रमुख आधार बनाया जाता है।
इसी कसौटी पर अश्विनी पारीक और पुष्पा पारीक का चयन यह दर्शाता है कि दोनों ने अपने सार्वजनिक जीवन में केवल संगठनात्मक भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों पर भी निरंतर सक्रियता बनाए रखी है। अश्विनी पारीक लंबे समय से कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने, सामाजिक अभियानों और जनजागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। दूसरी ओर, पुष्पा पारीक भी महिला सहभागिता, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े कार्यों में निरंतर सक्रिय रही हैं। यही कारण है कि दोनों को राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व विकास के इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए चुना गया है।
यह चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान समय में राजनीति में केवल जनाधार पर्याप्त नहीं माना जाता। बदलते लोकतांत्रिक परिवेश में संवैधानिक समझ, संवाद क्षमता, नीति निर्माण की जानकारी और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करने की योग्यता भी उतनी ही आवश्यक हो गई है। ‘द गुड पॉलिटिशियन प्रोग्राम’ इन्हीं मूल्यों पर आधारित नेतृत्व तैयार करने का प्रयास है।
कार्यक्रम के लिए जारी चयन पत्र के अनुसार प्रतिभागियों को केवल प्रशिक्षण नहीं दिया जाएगा, बल्कि लोकतंत्र, संविधान, सार्वजनिक नीति, नेतृत्व विकास, संवाद कौशल, सामाजिक समावेशन और नैतिक राजनीति जैसे विषयों पर गहन अध्ययन एवं व्यवहारिक अनुभव भी कराया जाएगा। तीन आवासीय प्रशिक्षण सत्रों के साथ ऑनलाइन मॉड्यूल में न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। अनुशासन, समानता, पारदर्शिता और सम्मान कार्यक्रम के मूल सिद्धांत हैं तथा किसी भी प्रकार के भेदभाव या अनुशासनहीनता के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम भारतीय लोकतंत्र में गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि ऐसे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से होती है जो समाज की वास्तविक जरूरतों को समझते हों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों। अश्विनी और पुष्पा पारीक का चयन इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि यह हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिले के सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत देता है।
जिले के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी इस उपलब्धि को सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे हनुमानगढ़ के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को नई प्रेरणा मिलेगी कि यदि कार्यशैली ईमानदार, समाजोन्मुख और सकारात्मक हो तो राष्ट्रीय स्तर के मंचों तक पहुंचना संभव है।
माना जा रहा है कि अश्विनी पारीक और पुष्पा पारीक का यह चयन केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी भी है। इस कार्यक्रम से प्राप्त प्रशिक्षण, अनुभव और राष्ट्रीय स्तर के संवाद निश्चित रूप से उनके सार्वजनिक जीवन को नई दिशा देंगे। साथ ही, यह उपलब्धि हनुमानगढ़ के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि जिले की प्रतिभाएं अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व निर्माण की प्रक्रिया में भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।







