





ग्राम सेतु ब्यूरो
अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देश की आजादी के आंदोलन की स्मृतियां जीवंत हो उठीं। महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष पहुंचकर उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित किए और सूत की माला पहनाकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान गांधीजी के नेतृत्व में चले भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए देश की एकता, आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति के जिला युवा समन्वयक मनोज बड़सीवाल ने भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास और वर्तमान समय में गांधीवादी विचारों की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
जिला युवा समन्वयक मनोज बड़सीवाल ने कहा कि 8 अगस्त 1942 का दिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया गया था। मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अधिवेशन में गांधीजी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का बिगुल बजाया था।
उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को तत्काल समाप्त करना और देश को पूर्ण स्वतंत्रता दिलाना था। यह आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम का ऐसा निर्णायक पड़ाव बना, जिसने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी।
मनोज बड़सीवाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने गोवालिया टैंक मैदान से देशवासियों को ‘करो या मरो’ का संदेश दिया था। यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि देश की आजादी के लिए अंतिम और निर्णायक संघर्ष का आह्वान था। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और जनभागीदारी के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी और करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ दिया।
बड़सीवाल ने कहा कि आज जब हम महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं, तब उनके विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आचरण में उतारने की आवश्यकता है। गांधीजी का जीवन हमें सत्य, अहिंसा, त्याग, सद्भाव और आपसी भाईचारे का रास्ता दिखाता है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान से मिली है। इसलिए आज की पीढ़ी का दायित्व है कि वह स्वतंत्रता के मूल्यों की रक्षा करे और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए अपनी भूमिका निभाए।
कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद सूत की माला पहनाकर श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित लोगों ने गांधीजी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। वातावरण में देशभक्ति और राष्ट्रपिता के प्रति सम्मान का भाव दिखाई दिया।
मनोज बड़सीवाल ने कहा कि गांधीजी ने समाज को जोड़ने का काम किया। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना भी था जिसमें हर व्यक्ति सम्मान और समानता के साथ जीवन जी सके।
बड़सीवाल ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कार्यक्रम के माध्यम से आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की कामना की। उन्होंने कहा कि समाज में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। गांधीजी का दर्शन हमें संवाद और शांतिपूर्ण रास्ते से समस्याओं का समाधान करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को इतिहास से जुड़ना होगा और देश के लोकतांत्रिक एवं सामाजिक मूल्यों को मजबूत करना होगा।
कार्यक्रम में रामनिवास वर्मा, द्वारका प्रसाद वर्मा, मुकद्दर अली, राजेंद्र बड़सीवाल, नरेंद्र कुमार, रामभक्त चाहर, कुलदीप लखेसर, सरोज खान, दीपक पेंटर, दलीप सिंह शेखावत, विकास धूड़िया, गुगन नायक, सुभाष सेतिया, जरनैल सिंह और अजय वर्मा, राजू सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में महात्मा गांधी के बताए सत्य, अहिंसा और भाईचारे के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि आजादी के आंदोलन की स्मृतियां केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनसे वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा मिलनी चाहिए।







