




ग्राम सेतु डेस्क
किसी मरीज के लिए रक्त की एक यूनिट सिर्फ एक जरूरत नहीं होती, बल्कि कई बार वह जिंदगी और मौत के बीच उम्मीद की सबसे मजबूत डोर होती है। अस्पताल में भर्ती किसी मरीज या उसके परिजन को जब समय पर रक्त मिल जाता है तो चेहरे पर लौटती राहत ही रक्तदान की असली ताकत बताती है। इसी सोच को अपना उद्देश्य बनाकर ‘नई आशा नई किरण’ संस्था पिछले 13 वर्षों से रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उम्मीद जगाने का काम कर रही है।
संस्था की शुरुआत भी एक मानवीय भावना से हुई थी। करीब 13 साल पहले भाजपा नेता अमित चौधरी के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए उनके समर्थकों ने 16 अगस्त को रक्तदान शिविर आयोजित करने का फैसला किया। समर्थकों की ओर से इसे अमित चौधरी के लिए जन्मदिन के तोहफे के रूप में देखा गया, लेकिन यह तोहफा किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। इसके पीछे मकसद था कि रक्तदान के जरिए किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में योगदान दिया जाए।
यही छोटा-सा प्रयास आगे चलकर एक संस्था और सेवा अभियान का रूप लेता गया।
भाजपा नेता ओम सोनी के मुताबिक, ‘नई आशा नई किरण’ का मूल उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग करना और समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता पैदा करना है। संस्था का मानना है कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है। इसे न तो कारखाने में बनाया जा सकता है और न ही किसी दुकान से खरीदा जा सकता है। किसी स्वस्थ व्यक्ति का स्वैच्छिक रक्तदान ही जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन का सहारा बनता है।
दीपक खाती ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ को बताते हैं, ‘16 अगस्त से संस्था का रिश्ता समय के साथ और भावनात्मक होता गया। संयोग से पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का निधन भी 16 अगस्त को हुआ। इसके बाद संस्था ने इस दिन आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर को दो भावनाओं से जोड़ दिया, एक तरफ भाजपा नेता अमित चौधरी के जन्मदिन का अवसर और दूसरी तरफ अटलजी की पुण्यतिथि।’
इस तरह रक्तदान शिविर अब जन्मदिन समारोह से आगे बढ़कर मानव सेवा और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक बन गया। युवा नेता अमित चौधरी को समर्थकों की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जाती हैं तो अटलजी को रक्तदान जैसे पुनीत कार्य के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
भाजपा नेता अमित चौधरी का कहना है कि जन्मदिन पर इससे बेहतर उपहार और क्या हो सकता है कि किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में हमारा छोटा-सा योगदान हो। उनके अनुसार रक्तदान समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का सरल और प्रभावी माध्यम है। एक व्यक्ति का रक्तदान किसी दूसरे व्यक्ति के परिवार में खुशियां लौटा सकता है। यही भावना इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है।
इस वर्ष भी 16 अगस्त, रविवार को हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित जाट भवन में सुबह 9.15 बजे से रक्तदान शिविर का आगाज होगा। संस्था की ओर से आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजकों का कहना है कि शिविर में जिलेभर से लोग पहुंचेंगे और स्वैच्छिक रक्तदान करेंगे।
आयोजन में रक्तदान के साथ अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी जाएगी तथा अमित चौधरी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जाएंगी। संस्था का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग शिविर से जुड़ें और रक्तदान के महत्व को समझें।
निवर्तमान पार्षद हिमांशु महर्षि कहते हैं कि रक्तदान केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। जब किसी मरीज को अचानक रक्त की जरूरत पड़ती है तो उस समय उसके परिजन की चिंता को वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसने कभी अस्पताल में रक्त के लिए भटकने की स्थिति देखी हो। उनका कहना है कि लोगों को रक्तदान के प्रति फैली अनावश्यक आशंकाओं से बाहर निकलना चाहिए और स्वस्थ होने पर नियमित अंतराल में स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
रक्तदान को लेकर भ्रांतियां दूर करना भी मकसद
‘नई आशा नई किरण’ का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रक्तदान को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों को दूर करना भी है। कई लोग यह सोचकर रक्तदान नहीं करते कि इससे शरीर में कमजोरी आ जाएगी या स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा। जबकि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा चिकित्सकीय मानकों के अनुसार किया गया रक्तदान सामान्यतः सुरक्षित प्रक्रिया है।
ओम सोनी का कहना है कि रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक एक रक्तदाता अपने रक्त से एक से अधिक मरीजों की मदद कर सकता है, क्योंकि रक्त के अलग-अलग घटकों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों में किया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ और पात्र व्यक्ति को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि संस्था का प्रयास केवल एक दिन शिविर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति विकसित करना है।
13 साल का सफर, आगे भी जारी रहेगा संकल्प
13 साल पहले शुरू हुआ यह अभियान अब एक सामाजिक पहचान बन चुका है। संस्था के लिए 16 अगस्त सेवा, संवेदना और स्मरण का दिन है। एक ओर अमित चौधरी का जन्मदिन है, जिसे रक्तदान के माध्यम से मानवता की सेवा से जोड़ा गया है, तो दूसरी ओर अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि है, जिन्हें राष्ट्र के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन की गरिमा के लिए याद किया जाता है।
संस्था के प्रतिनिधियों के मुताबिक, रक्तदान शिविर के माध्यम से संस्था समाज को यही संदेश देना चाहती है कि किसी की जिंदगी बचाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी स्वस्थ व्यक्ति का कुछ समय और उसके रक्त की कुछ मात्रा किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को खुशी में बदल सकती है।







