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बीजेपी ने शहरी निकाय चुनाव में अधिकांश नगर निगमों, नगर परिषदों और पालिकाओं में अपने बोर्ड बनाकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस जीत के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और वे नई ऊर्जा के साथ मैदान में डटे हैं। लेकिन शहरी जीत की इस चमक के बीच ग्रामीण इलाकों में चुनौतियां कम नहीं हैं। सामने पंचायतीराज चुनाव दस्तक दे रहे हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री अब संभाग स्तर पर जमीनी नब्ज टटोलने में जुट गए हैं। बीकानेर के बाद श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में उनका ताजा दौरा इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
इस दौरे में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में सिंचाई पानी की भारी किल्लत और किसानों का आंदोलन रहा। किसानों की दो टूक मांग है कि उन्हें ‘चार में से दो बारी’ पानी दिया जाए। वहीं सिंचाई महकमे ने साफ हाथ खड़े करते हुए कह दिया है कि पानी की उपलब्धता इतनी कम है कि यह मांग पूरी नहीं की जा सकती। पेंच यहीं फंसा हुआ है।
ग्रामीण इलाकों की राजनीति पूरी तरह खेती-किसानी और पानी पर टिकी होती है। किसान चार में से दो बारी से कम पर राजी होंगे, इसमें बड़ा संशय है। ऐसे में सीएम भजनलाल शर्मा अब इस टकराव को टालने के लिए बीच का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। सूरतगढ़ दौरे के दौरान सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी रहीं कि क्या सरकार आंदोलन की राह पकड़े किसानों को कोई ठोस राहत दे पाएगी या यह विवाद यूं ही खिंचता रहेगा।

पंचायतीराज चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही मुख्यमंत्री पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं। सूरतगढ़ में उन्होंने हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर, दोनों जिलों के कद्दावर नेताओं को तलब किया। मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच और प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल ने भी नेताओं से सीधी बातचीत की और मैदानी हकीकत का जायजा लिया।
हनुमानगढ़ से जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र पारीक और विधानसभा प्रत्याशी रहे अमित चौधरी सहित कई प्रमुख चेहरों ने इस बैठक में अपनी बात रखी। नेताओं ने अपने-अपने इलाकों की वस्तुस्थिति, कार्यकर्ताओं के मन का हाल और जनता के मूड से मुख्यमंत्री को रूबरू कराया।
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नेताओं को दो टूक संदेश दिया कि नगर निकाय चुनाव की जीत अपनी जगह है, लेकिन असली परीक्षा अब पंचायतीराज चुनाव में है। जहां कहीं भी कोई कमी रह गई हो, उसे वक्त रहते सुधार लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संगठन अपने स्तर पर पूरी ताकत झोंके, बाकी जिम्मेदारियां सरकार पर छोड़ दी जाएंकृसरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह तैयार और सजग है।
मुख्यमंत्री के संबोधन का मूल मंत्र यही था कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर, दोनों ही जिलों में भाजपा का जिला प्रमुख बनना चाहिए और ज्यादातर पंचायत समितियों में पार्टी के प्रधान चुने जाने चाहिए, ताकि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर ‘ट्रिपल इंजन’ की व्यवस्था मजबूत हो सके। इस दौरान सीएम ने उन स्थानीय नेताओं की जमकर हौसलाअफजाई की, जिन्होंने नगरपालिकाओं में सीटें कम होने के बावजूद जोड़-तोड़ और रणनीति से भाजपा का बोर्ड बनवा दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान को थामने की एक गंभीर कोशिश थी। टिकट वितरण से लेकर स्थानीय स्तर की गुटबाजी को दरकिनार कर सभी को एकजुट होकर काम करने का कड़ा संदेश दिया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संगठन में एकजुटता का यह मंत्र जमीन पर असर दिखाएगा? और क्या सरकार किसानों के इस कड़वे पानी विवाद का कोई ऐसा हल निकाल पाएगी जिससे आंदोलन भी थमे और आने वाले पंचायतीराज चुनाव में पार्टी की राह भी आसान हो सके? सबकी नजरें अब आने वाले दिनों के फैसलों पर टिकी हैं।






