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हनुमानगढ़ जिले की ग्रामीण राजनीति में आगामी पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी फंड में गबन और पद के दुरुपयोग के मामलों में घिरे हनुमानगढ़ जिले के 12 पूर्व सरपंच अब अगले 5 वर्षों तक पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग की सिफारिश पर प्रदेश भर के 322 पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ हनुमानगढ़ के इन 12 पूर्व सरपंचों को भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह अयोग्य (बैन) घोषित कर दिया है। आयोग के इस सख्त रुख के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों और ग्राम पंचायतों में खलबली मच गई है, क्योंकि बैन की जद में आए कई पूर्व जनप्रतिनिधि आगामी चुनावों में फिर से अपनी ताल ठोकने की तैयारी कर रहे थे।
पंचायती राज विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई अयोग्य जनप्रतिनिधियों की सूची में हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी और हनुमानगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले प्रमुख पूर्व जनप्रतिनिधियों में टिब्बी पंचायत समिति क्षेत्र के बेहरवाला कलां की पूर्व सरपंच शकुंतला, बशीर के पूर्व सरपंच रणवीर, सलेमगढ़ मसानी की पूर्व सरपंच ममता देवी, मिर्जावाली मेर के पूर्व सरपंच जगदीश, डबली खुर्द के पूर्व सरपंच केसराराम, डबली कलां की पूर्व सरपंच सुमन, चाहूवाली के पूर्व सरपंच जगदीश, सहारणी के पूर्व सरपंच वेदप्रकाश, रामसरा (रामसरां) के पूर्व सरपंच हरबंश सिंह, हनुमानगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र पक्कासारणा के पूर्व सरपंच विजय झाझड़ा, फतेहगढ़ के पूर्व सरपंच नौरंगचंद चांवरिया व पीरकामडिया की पूर्व सरपंच डिंपल शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सितंबर 2026 में पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर ऐसे तमाम जनप्रतिनिधियों का ब्योरा तलब किया था, जिनके खिलाफ कार्यकाल के दौरान गंभीर आरोप सिद्ध हुए थे। विभाग द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार निम्नलिखित श्रेणियों में आने वाले जनप्रतिनिधियों पर यह कार्रवाई की गई है। कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों के नाम पर मिले सरकारी बजट में भारी हेरफेर करना। पंचायती राज नियमों के तहत गबन, भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के मामलों में दोषी पाया जाना। अपने कार्यकाल का विधिवत वित्तीय ऑडिट न कराना, पूरा रिकॉर्ड जमा न करना अथवा बकाया राशि की वसूली बाकी होना।
संभागीय आयुक्तों से रिपोर्ट मिलने के बाद पंचायती राज विभाग ने 7 अक्टूबर 2026 को पूरे प्रदेश के 322 दागी जनप्रतिनिधियों की अंतिम सूची राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी थी, जिस पर आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैन की मुहर लगा दी।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि पंचायती राज विभाग से अयोग्य ठहराए गए जनप्रतिनिधियों की सूची प्राप्त हो चुकी है। आयोग ने सख्त फैसला लेते हुए इन सभी के चुनाव लड़ने पर पूर्ण रोक लगा दी है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को विस्तृत सूची भेज दी गई है ताकि नामांकन के दौरान इनकी अर्जी तुरंत निरस्त की जा सके। पंचायती राज विभाग के सचिव जोगाराम के अनुसार, जिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता और गबन के प्रकरण प्रमाणित पाए गए हैं, उन्हें संभागीय आयुक्त द्वारा जांच के आधार पर अयोग्य घोषित किया जाता है। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखना है।
विधिक मामलों के विशेषज्ञ शंकर सोनी ने बताया कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत यदि कोई भी जनप्रतिनिधि (सरपंच, उपसरपंच, प्रधान या वार्ड पंच) वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा गबन में संलिप्त पाया जाता है, तो कानूनन उसे चुनाव प्रक्रिया से बाहर (अयोग्य) करने का स्पष्ट और कड़ा प्रावधान है। यह रोक उसी विधिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
हनुमानगढ़ जिले के जिन गांवों के पूर्व सरपंचों को अयोग्य घोषित किया गया है, वहां अब चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। कई पंचायतों में इन पूर्व जनप्रतिनिधियों के समर्थक और परिवारजन अब विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। प्रशासन की इस सख्ती से यह कड़ा संदेश गया है कि जनता के पैसों में हेरफेर करने वालों के लिए लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया के दरवाजे अब पूरी तरह बंद हैं।





