




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ में सूरतगढ़ रोड स्थित श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल सभागार में 25 अक्टूबर को मधुमक्खी पालन जागरूकता महोत्सव 2025 का आयोजन किया गया। भारतीय मधुमक्खी पालक किसान यूनियन द्वारा आयोजित इस महोत्सव में राजस्थान राज्य सहित देश के विभिन्न अन्य राज्यों से आये सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप थे, विशिष्ट अतिथि के रूप में किसान नेता रेशम सिंह, गाँव मुंडा पंचायत के प्रशासक अमर सिंह सिहाग, डबली राठान पंचायत के प्रशासक जगतार सिंह बराड़, जॉइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. रमेश बराला, बीएमयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश कुमार जांगू, बीएमयू के राष्ट्रीय सलाहकार प्रमुख अजीत कुमार उपस्थित रहे।

स्वागतीय उद्धबोधन देते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों को मधुमक्खी पालन के बारे में नवीनतम तकनीकों और बाजार की जानकारी साँझा करते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में शहद की बढती मांग के कारण वर्तमान में मधुमक्खी पालन अधिक लोकप्रिय हो रहा है। यह ऐसा व्यवसाय है जो ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर युवाओं, महिलाओं और भूमिहीन किसानों के लिए स्वरोजगार के अवसर प्रदान करता है। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के किसानों की उन्नति, वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा देने के क्षेत्र में कार्य कर रही है। जुनेजा ने कहा कि एसकेडी यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वितपोषित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र के रूप में स्वीकृत किया गया है। गत कई महीनो से यहाँ पर मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि मधुमक्खी पालक किसान जैविक और स्थायी मधुमक्खी पालन प्रथाओं को अपनाकर अपने उत्पादों से अधिक से अधिक मुनाफा अर्जित करें जुनेजा ने जोर देते हुए कहा कि यह सत्य है कि असली शहद जमता है और मधुमक्खियां पर्यावरण को स्वच्छ रखती हैं।

पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ. रामप्रताप ने शहद उत्पादक किसानों को पुरानी खेती तकनीक और नवीनतम वैज्ञानिक खेती के सामंजस्य को देशी भाषा में उदाहरण देते हुए बताया कि जहाँ कृषि अधिकारी अपनी कार्यशैली में लापरवाहियां बरत रहे हैं वहीँ किसानों में भी जागरूकता का अभाव देखने को मिल रहा है। बीज नकली, डीएपी नकली, कीटनाशक नकली और फसलों का उचित भाव नहीं मिल रहा। किसान वर्ग को चौतरफ़ा मार झेलनी पड़ रही है और आवाज उठाने पर उसको लाठियां मिलती हैं। उन्होंने गंभीर होते हुए कहा कि मधुमक्खी पालकों को भी एक जुट होना पड़ेगा तभी शहद को बाजार में उचित भाव मिलेंगे। किसानों को इंगित करते हुए कहा कि आप शहद बेचान के समय कच्ची पर्ची क्यों लेते हो ? हनुमानगढ़ का वातावरण शहद उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है और इसे ‘हनी हब’ बनना चाहिए। डॉ. रामप्रताप ने कहा कि मधुमक्खियाँ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है यह न केवल शहद देती है बल्कि परागण के जरिये हमारी खेती को समृद्ध करती है और पर्यावरण का सरंक्षण करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘हनी मिशन’ आज गाँवों की आजीविका का बड़ा आधार बन चुका है।

बीएमयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश कुमार जांगू ने कहा कि हरियाणा सरकार ने राज्य में मधुमक्खी पालक किसानों को लाभान्वित करने के लिए भावंतर योजना लागू की है। हमारी मांग है कि इस योजना को राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी लागू किया जाए। बॉक्स, मशीन आदि उपकरणों सहित शहद से निर्मित आइसक्रीम, मिठाई, केक आदि पर भी सरकार द्वारा अनुदान दिया जाए। शहद की खपत बढे इसलिए इसे आँगनबाढ़ी केन्द्रों और सेना डाईट में शामिल किया जाए। उन्होंने नेशनल बी बोर्ड में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल करने की मांग के साथ ही मधुमक्खी पालन संगठनों को एक मंच पर संगठित होने का आह्वान भी किया। गाँव मुंडा सरपंच अमर सिंह सिहाग ने कहा कि एसकेडी यूनिवर्सिटी किसान हितों को लेकर क्षेत्र में महतवपूर्ण कार्य कर रही है। उन्नत किसम के पशुपालन, अश्व पालन, बीज निर्माण, जैविक खेती ‘मधुमक्खी पालन’ के अलावा कृषि से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा शोध कार्य भी किये जा रहें है। इससे क्षेत्र के किसानों का जीवन स्तर बढेगा। कुछ समय पहले एसकेडी यूनिवर्सिटी में हुए किसान मेले को भी उन्होंने खेती किसानी को प्रोत्साहन करने में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

किसान नेता रेशम सिंह ने कृषि क्षेत्र में नवीनतम कार्यों को लेकर विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इलाके के किसान वर्तमान में यूनिवर्सिटी को लेकर आशाविन्त है कि आने वाले समय में खाद, बीज, प्रोसेसिंग प्लांट आदि सभी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध हो जाएँ। जॉइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. रमेश बराला ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में मधुमक्खी पालकों की सबसे बढ़ी समस्या वाजिब रेट नहीं मिलना है। मधुमक्खी पालन में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। शहद उत्पादन के साथ-साथ यह मित्र कीट भी है जिससे फसलों में परागण बढ़ता है। विभाग द्वारा किसानों को समय पर अनुदान दिया जा रहा है। बीएमयू के राष्ट्रीय प्रमुख सलाहकार अजीत कुमार और हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नरेश सैनी ने भी मधुमक्खी पालक किसानों के लिए भावंतर योजना को देश भर में लागू करने की मांग उठाई।

रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला ने किसानों को नवीनतम जानकारी देते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर गाँव की महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन सकती है। मधुमक्खी पालन के प्रति बढती रूचि एक उत्साह जनक संकेत है यह ना सिर्फ शहद उत्पादन का संकेत है बल्कि किसानों की आय, फसल उत्पादकता और पर्यावरण संतुलन के लिए भी अत्यंत जरुरी है। कृषि मंत्रालय ने इस क्षेत्र के लिए पुरे उत्तरी राजस्थान एक बढ़ी कमान यूनिवर्सिटी को सौंपी है जिस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

