रूंख भायला.
राजी राखै रामजी! आज बात पैरणै अर ओढणै री, मतलब गाभै लत्तै री, गाभा लत्ता, जिकां आपां घर में पै’रां, जिका आपां नौकरी का आपरै काम धंधै पर पै’रां, जिका आपां ब्याव उच्छब रै मौकै ओपावां, जिका आपां किणी सोग में पै’रां….., अर बै गाभा लत्ता जिकां री मोटी दुकानां, स्टोर्स अर शोरूम अबार आखी दुनिया नै चकरी चढा राख्यो है। आपणै देखतां देखतां अस्सी कळी रा घाघरिया अर पेच आळी पागां रा दिन तो लदग्या, अबै तो फाटेड़ी जिंसां…दो लीरी कांचळ्यां….कैटवॉक करती नागी उघाड़ी टींर्ग यां….!
कहिजै, खावो मन चाइजतो पण पै’रो जग भांवतो। साची बूझो तो गाभा लत्ता आज रै बगत में मिनख री पिछाण बणग्या है। बोलण रो सूर होवै भलंई नीं, पण जे ढबसर रा गाभा पै’रयोड़ा है, पछै अेकर तो हर मै’फल, हर भेळप में आपरी गिणत स्याणां में ई होवै। दूजै कान्नी जे आप भण्या गुण्या विद्वान अर जाणीजाण हो पण आपरा गाभा लत्ता सावळ नीं है तो कोई नीं बूझै आपनै! आप सूं हाथ मिलावता ई संकै है लोग, जे नीं जचौ, तो पिता’र देख लेया। आपणै अठै तो कांई ठाह किसी’क गूंग बापरी है, किणी कलेक्टर/एसडीएम का दूजै अधिकारी कन्नै सीधो सो कुड़तो पजामो अर चप्पलां पैर’र उड़ जावो तो बो ओ ई मानै कै आवणियो कोई गांवड़ियो झालर है, ओ लाई राज री बात नै कांई जाणै…..अर जे आपां उण सूं आपणी बोली में बात करां तो बो आपां नै ठेठ गंवार ई मानै अर टरकावणै री करै। पण जे आप बूंट अर बैल्ट कसेड़ा हो अर हिंदी का अंग्रेजी बोल रैया हो तो बो आपरी बात तो सुण ई सी, हो सकै आवबेस ई चोखी देवै। अबै थे ई बतावो, कदर मिनख री है का उण रै पैराव री, उण रै मूंडै सूं नीसरती ओपरी भासा री !
गालिब रै नांव सूं भोत सारा किस्सा लाधै, कीं साचा, कीं कूड़ा…। आं कूड़ी साची बातां में अेक बात गाभै लत्ता री भी आवै। कहिजै, गालिब रै मान सनमान सारू बादसाह सलामत अेक सिंझ्या मोटो जीमण राख्यो। गालिब चावा ठावा सायर तो हा ई, बातपोस ही भोत तकड़ा…। बां रै कन्नै दरबार रो नूंतो पूग्यो, नूंतै मुजब ‘आप रै सनमान में बादसाह सलामत कान्नी सूं सिंझ्या अेक जीमण राखिज्यो है, आप नै घणै मान बगतसर सात बजे पधारणो है।’ गालिब अणूता राजी होया, फक्कड़ अर मस्त मौलड़ आदमी, दिन भर उडीकता रैया, कद सिंझ्या होवै ! पण लूंकड़ी री खतावळ सूं काकड़िया थोड़ी पाकै ! खैर….सिंझ्या ढळी अर गालिब तो हा जिस्या ई चाल पड़्या दरबार हाल कान्नी। हाथ मूंडो ई नीं धोयो, उण पर सळा भरयोड़ो कुड़तियो अर नीचौ बिस्योई पजामो…। दरबार हाल में जद बड़न लाग्या तो गेट पर उभ्यै संतरी बूकियो झाल लियो, ‘‘किधर जाता है ?’’ गालिब बड़ी धीरजाई सूं कैयो, भाई आज म्हारै सनमान में जीमण है, म्हानै जावण दे।’’
‘‘हूं हं…, चल भाग अठै सूं, जीमण तो गालिब साहब रै सनमान में है !’’
‘‘म्हूं ई गालिब हूं भाई, जावण दे !’’
‘‘देख्या तेरा डोळ, तेरे सिरखा दस गालिब आवै दिन में….भाग अठै सूं, नीं कूटीजैलो, बादसाह सलामत रै आवण रो बगत होग्यो है !’’ संतरी उण नै धक्का देय’र बठै सूं भजा दियो। गालिब लाई कांई करता, मूंडो छा सो ले’र रैयग्या। बेटी आज तो ठीक होई, आ सोचता घर कान्नी टुरग्या। मारग में अेक भायलो मिलग्यो बण टोक्यो, ‘अरे गालिब साब, आज तो थारै सनमान में जीमण हो नीं, कांई होयो ?’ गालिब उण नै ही जिसी बात बताय दी। भायलो चातर हो, गालिब रा डोळ देख’र बात समझग्यो। बान्नै परचा’र आपरै घरै लायो, अलमारी सूं आपरो नवो बंद गळै रो लाम्बो कोट अर पजामो काड’र दियो, बोल्यो, ‘हाथ मंूडो धोल्यो अर अे पैरो ! पछै जावो।’ गालिब अेकर तो साव नटग्या पण भायलै घणी जिद करी तो मन मार’र गाभा पैर लिया अर भळै दरबार हॉल रै उणी सागी गेट पर जा पूग्या। इण बिच्चाळै बादसाह सलामत अर दूजा मानिता मै’मान भी आग्या हा, नवै गाभै लत्तां में संतरी ई नीं पिछाण सक्यो कै ओ सागी आदमी है, बण सिर झुका’र गेट खोल दियो। मै’फल में बादसाह अर दूजै लोगां गालिब नै घणै मान आवबेस दी, कोड सूं बांरी सायरी सुणी। थोड़ी’क ताळ में जीमण सरू होयो, बादसाह भेळै दूजै लोगां देख्यो, गालिब थाळी सूं जळेबी उठावै अर आपरै कोट री कालर कान्नी करै, जळेबी पछै गुलाबजामन, चक्की अर दूजी सै मिठाइयां कालर रै लगावै…पण कोट बापड़ै रै मूंडो थोड़ी हो जिको जीमै ! बादसाह सूं रैयो नीं गयो, बोल्या,
‘‘गालिब साहब, ये क्या कर रहे हैं ?’’
गालिब बोल्या, ‘‘बादसाह सलामत, म्हूं तो इण कोट रा न्हौरा काडूं, खा ले यार, संको क्यूं करै, ओ जीमण थारै सारू ई है !’’
‘‘गालिब साहब, वैसे यह भोज तो आपकी शान में है, कोट की नहीं !’’ बादसाह कैयो।
गालिब बोल्या, ‘‘माफी दिराया बादसाह सलामत ! जीमण तो इण कोट सारू ई लागै है, नीं पछै गालिब तो पैलां ई अठै आयो, बीं री तो कुणी सुणी ही कोनी, उल्टा धक्का देय’र बारै काडीज्यो हो बापड़ो गालिब…!’’
आगै री बात थे जाणो ई हो। गाभा लत्ता सूं ई मिनख ओळखीजै, ओ ई संसार रो नेम है। धौळा कुड़ता पजामा नेतावां री पिछाण बणग्या नीं ! गाभै लत्तै री लीला रै पाण ई तो मोटोड़ा ब्रांड पांघर्या है, मिनख रै सुभाव नै अे ब्रांडधारी कॉरपोरेट ‘तांतड़ा’ चोखी तरियां पिछाणै, आए दिन नवा फैसन, नवा डिजाइन… बस गूंझै में पइसा होवणा चाहिजै।
बात रो सार ओ है कै इण बदळ्यै बगत में मिनख री पिछाण मिनखपणै सूं नीं, उण रै गाभां सूं हो रैयी है। आ जगती रीत चाल ई पड़ी तो मानणै में भलाई है। आदमी हो चायै लुगाई, सब नै पैराव रो कीं ध्यान राखणो चाहिजै अर ओपतो कपड़ो पैरणो चाहिजै। बगत अर जिग्यांसर सावळ ढंग सूं पैर्याेड़ा गाभा आपरो माण तो बधावै ई, आपरै मांयलै बिसवास नै ई कीं मजबूत करै। बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेेखक राजस्थानी और हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं
