




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ टैक्स बार एसोसिएशन के तत्वावधान में एक दिवसीय व्यावसायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कर विशेषज्ञ, अधिवक्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स शामिल हुए। सेमिनार का उद्देश्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े विवादों, विभागीय कार्यवाहियों तथा व्यवहारिक चुनौतियों पर अद्यतन और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करना रहा। आयोजन ने पेशेवर दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ कर कानून की जमीनी समझ को भी मजबूत किया।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में जयपुर से आए एडवोकेट (सीए) राहुल लखवानी, एडवोकेट उत्कर्ष मिश्रा तथा सीए दीक्षा खंडेल ने सहभागिता की। वक्ताओं ने जीएसटी विवाद निवारण, विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस, अपील प्रक्रिया और करदाताओं के अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते कानून और न्यायिक दृष्टांतों को समझे बिना प्रभावी पैरवी संभव नहीं है, इसलिए निरंतर अध्ययन और अभ्यास अनिवार्य है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मॉक जीएसटीएटी न्यायाधिकरण रहा, जिसमें प्रतिभागियों को वास्तविक न्यायाधिकरण जैसी कार्यवाही का अनुभव कराया गया। इस अभ्यासात्मक सत्र में अलग-अलग महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई की गई, जिससे प्रतिभागियों को तर्क प्रस्तुत करने, साक्ष्य रखने और विभागीय पक्ष का सामना करने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।
मॉक न्यायाधिकरण में सबसे पहले रेलवे मंत्रालय से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें जीएसटीआर-2ए में विवरण प्रतिबिंबित न होने के कारण निवेश कर समायोजन (आईटीसी) अस्वीकृत किए जाने का मुद्दा उठाया गया। इसमें पक्षकार प्रतिनिधि के रूप में एडवोकेट दिनेश बंसल और विभागीय प्रतिनिधि के रूप में एडवोकेट दीपांशु गोयल ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
दूसरे मामले में आपूर्तिकर्ता का पंजीकरण निरस्त होने के कारण आईटीसी अस्वीकृति, जिसे आमतौर पर फर्जी आईटीसी कहा जाता है, पर सुनवाई हुई। पक्षकार की ओर से सीए सुशील मित्तल और विभाग की ओर से एडवोकेट अमित चुघ ने दलीलें दीं।
तीसरे प्रकरण में धारा 16(2)(सी) के अंतर्गत आईटीसी अस्वीकृति का मुद्दा सामने आया, जिसमें सीए यश मित्तल ने पक्षकार का और एडवोकेट सुरेश कुमार ने विभाग का प्रतिनिधित्व किया।
इसके बाद सैनिटाइज़र के वर्गीकरण को लेकर रोचक बहस हुई। इस विषय पर सीए तुषार गोयल ने पक्षकार प्रतिनिधि के रूप में और सीए साहिल गोयल ने विभागीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी प्रस्तुतियां दीं।
अंतिम मामले में कच्चे कपास के वर्गीकरण एवं मूल्यांकन से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई हुई, जिसमें एडवोकेट अरविंद अग्रवाल ने पक्षकार का तथा सीए तुषार गोयल ने विभाग का पक्ष रखा। इन सभी मामलों में न्यायाधिकरण जैसी प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला।
सेमिनार के दौरान जीएसटीएटी प्रपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया, सर्वे, तलाशी एवं अन्य विभागीय कार्यवाहियों, साथ ही जीएसटी कानून में हुए हालिया संशोधनों और उनके प्रभाव पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि सही दस्तावेजीकरण, समयबद्ध अनुपालन और तथ्यों की स्पष्ट प्रस्तुति से अधिकांश विवादों से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रोहित अग्रवाल ने की। उपाध्यक्ष राजेंद्र सिलू, सचिव विनय कुमार जिंदल, संयुक्त सचिव संदीप कुमार और कोषाध्यक्ष संदीप बाघला ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे व्यावहारिक कार्यक्रम कर पेशेवरों को आत्मविश्वास और दक्षता प्रदान करते हैं।
अंत में हनुमानगढ़ टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया। एसोसिएशन ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा।







