



रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! ‘हथाई’ में आज फेरूं बात आपणी भासा री, आपणै सबदां री। जद सूं सुप्रीम कोर्ट रो फैसलो आयो है, राजस्थानी रै तो पांख सा बापरग्या, फेरूं उडारी सारू उभी हो रैयी है आपणी भासा। सुण रैयो हूं, इंडिको री जैपर उडान में तो अनाउंसमेंट ई राजस्थानी में होवण लागी है ….। आ उडारी नीं, और पछै कांई ! केई भायलां, अर मिलणियां रा फोन आ रैया है, बधाई सारू। म्हूं कैवूं बधाई तो सिरमाथै, पण थे तो राजस्थानी बोलतां ई संको !
अेक भायलो बोल्यो, ‘बात तो ठीक कैवो थे ! थारै दांई बोलिजै ई कोनी। इस्यो गुड़-गोबर होयो है कै चावता थकां ई राजस्थानी रा सबद कोनी आवै……कीं सीखावो नीं ! आपणी भासा रा ‘गम्योड़ा सबद’ पाछा बतावो नीं, बरताव में ल्यावां।’
म्हूं वां री बात सुण’र अचरज में पड़ग्यो, पचास बरसां में ई राजस्थान रो आदमी आपरी भासा सूं कित्तो दूर होग्यो, अबै वो चावै तो ई उण सूं बोलीज नीं रैयी है राजस्थानी। बोलीजै तो सावळ हिंदी ई कोनी, पण तोई तरळा तो अंगरेजी रा ई करणा पड़ै, नीं करयां सरै ई कोनी !
पण फेरूं ई वां री हूंस देख’र कैयो-‘आपणी भासा मांय के दोराई है, पाछा घिरो जड़ां कान्नी, अर सीखो राजस्थानीपाछा घिरो जड़ां कान्नी, अर सीखो राजस्थानी। आज री हथाई में बात राजस्थानी रै कीं गम्योड़ै सबदां री, वान्नै पाछा बरताव में बपरावण री। आप ई बांचो दिखाण, दूजां नै भी बतावो-
शनिवार कोनी ओ, आपां थावर कैवां, स्याणै अर सूझवान नै सायर कैवां। सवाल जवाब कद करां, आपां तो नपूछा लेवां, रिपड़ा मा नै देवां जरूर, पण घड़ी खंड में पूठा लेवा। पारटी नंई ओ, आपां गोठ करां, नोरता निराहार कोनी, आपां निघोट करां। डैंन्ड्रफ कद बोलां, खोरो होवै, अर छेद कोनी मालकां, मोरो होवै। चीस जाड़ में चालै, तो सणफ पगां में, घोभा आंख में चालै, तो लोई रगां में। आंख्यां मांय गीड आवै, कान रो मैल ठेठी, सेडो निसरै नाक सूं बाई बणा गूंघला बैठी !
और आगै बधां तो-
गा गोबर करै तो भैंस करै पोठो, कच्ची भींत, सरकी री छात, ल्यो बणग्यो कोठो। बळद मूतै अर ऊंट करै चीढ, गा करै छिंगास, पखेरूआं री बींठ। सर्दी कोनी आपणै सियाळो होवै, अर चौकीदार कोनी रूखाळो होवै। गर्मी नै उन्हाळो कैवां, घणै सी नै पाळो, जल्दी नै खतावळ कैवां, करणियै नै काहळो। शताब्दी नै सईको कैवां, नुकसान नै फटको, जीमण में मोडो होग्यो, करो भाइड़ो चटको। चटकै री चाल देई पटकै री मौत, हूणी तो बलवान है, हरि करै सो होत। तो हरि नै भजो, पछै देखो मजो !
मजां रा कैवणा ई कांई, आपणी भासा में बोलस्यो तो ठसक न्यारी होसी। थे सरू तो करो-
लिपिस्टिक कोनी, सुरखी होवै, आदमी रै कानां में, लूंग का मुरकी होवै। बिंदी कोनी, टिक्की होवै, रायतै री बूंदी फिक्की होवै। चूही कोनी, आपां ऊंदरी कैवां, अंगूठी कद बोलां, बिंटी का मूंदड़ी कैवा। दालान कोनी आपणै बाखळ होवै, होळी में लपटां कोनी, झळ होवै। बोरटी रो पालो होवै खेजड़ी री लूंग, नीरो व्है ग्वार रो, लीलो होवै मूंग। बटोड़ै में थेपड़ी अर अकूरड़ी पर कचरो, बिणजारै रै होवता, भाई नै मत रो। दुकान बंद कोनी करां, मंगळ करां, गृहप्रवेश कोनी बोलां, न्यांगळ करां। मफलर नंई, कनपेच होवै, बकरी कोनी आपां घोन कैवां। घिलोड़ी में घी राखां, बखारी में दाणा, धावणियै में छा, चूल्है सारै छाणा। पळियै सूं दूध घालां मिरियै सूं घी, हांडकी में राबड़ी जचौ जित्ती पी। हटड़ी में लूण मिरच्यां, देगची में साग, पाणी रो पळिंडो जठै, जागै वां रा भाग।
भाग तो आज थारा ई जाग्योड़ा है, रूंख भायलै रै मांयली देबी मद में आयोड़ी है, ल्यो सीखण सारू अेक पुरसगारी और ल्यो-
बेतुकी बकबक नै ग्यास कैवां, भेळा काम करां तो ल्हास कैवां। बरतन कोनी, आपां ठांव कैवां, खाज-खुजली नै पांव कैवां। बेचौनी कोनी, आपणै तालामेली होवै, साग रांधणै नै देगची का तपेली होवै। दाल कोनी, दाळ होवै, मा री गाळ, घी री नाळ होवै। बिस्तर कोनी सोड फतरणा कैवां, सरकंडा कद बोलां, सरकणा कैवां। जाऊं नंई ओ, जाय’र आवूं कैवणो, बैर होवो भलंई, भायां में रैवणो। पसीनो नंई ओ, आपां पसेवो बोलां, तंग करणो नंई, आपां तो छाती छोलां। परेशान फारसी में करीजै, आपां तो अधावां, बहलाना कद बोलां, आपां तो बिलमांवां।
सबद तो घणाई है, पण जेकर अेकां साथै वांरी पुरसगारी करी तो पछै गळदाई हो जिसी। अेकर इत्ता ई घणा ई है, आन्नै बरतो तो सरी, जे सुणनिया कान नीं मांडै तो म्हानै कैय देया।
आज री हथाई रो सार ओ है, आप कठैई बसो, आपनै आपरी भासा नीं छोडनी चाहिजै। जे आप उण री बेकदरी करो, बिसरा देवो तो साची जाणो, आ दुनिया आपरी जूं जित्ती ई कदर नीं करै। इण सारू आपरी भासा आवणी ई चाहिजै, जे नीं आ रैयी है तो सीखो नीं ! सीखणै री कोई उमर थोड़ी होेवै। इण में कोई होड बडाई कोनी, अेक सबद रोज सीखो तो ई बडाई है आपरी….। बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बस्सो….।
-लेखक राजस्थानी और हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर हैं





