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राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने संगठन विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुंडवा के पूर्व सभापति सुभाष कंदोई को हनुमानगढ़ जिले का नया प्रभारी नियुक्त किया है। जिम्मेदारी संभालने के बाद पहली बार हनुमानगढ़ पहुंचे कंदोई ने जिला कोर कमेटी की बैठक ली और आगामी पंचायतीराज चुनावों की रणनीति साझा की। पेश है ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ के साथ बातचीत के मुख्य अंश
आगामी पंचायतीराज चुनावों में आप हनुमानगढ़ जिले में आरएलपी का क्या भविष्य देखते हैं?
-राजनीति पूरी तरह संभावनाओं पर टिकी होती है। हम पूरी तरह आशान्वित हैं कि पंचायतीराज चुनावों में आरएलपी उम्मीद के अनुरूप बेहतरीन प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने मुझे जिला प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसके तहत मैंने हनुमानगढ़ पहुंचकर कोर कमेटी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ गहन मंथन किया है। चुनाव को लेकर हमारी तैयारियां पूरी गति से जारी हैं।
चुनावों को लेकर आपकी मुख्य रणनीति क्या रहेगी? क्या किसी गठबंधन पर विचार चल रहा है?
-हनुमानगढ़ में लंबे समय से केवल दो ही दल कांग्रेस और भाजपा सक्रिय रहे हैं, लेकिन अब जिले की जनता इन दोनों दलों और इनके नेताओं से पूरी तरह ऊब चुकी है। यहां एक सशक्त ‘तीसरे मोर्चे’ की प्रबल संभावना है और आरएलपी इसी राजनीतिक शून्यता को भरेगी। रणनीति के तहत हम हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल से भी संपर्क साधेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि वे आरएलपी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरें।
जिले में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
-यह सच है कि हनुमानगढ़ में अभी तक आरएलपी का संगठनात्मक ढांचा उतना मजबूत नहीं हो पाया है, जितना होना चाहिए था। जबकि यह क्षेत्र किसान बाहुल्य है, इसलिए यहां पार्टी के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। हमारा पहला लक्ष्य चुनाव से पहले जिले में एक सशक्त संगठन खड़ा करना है। इसके लिए निरंतर बैठकों का दौर जारी रहेगा और निष्ठावान व सक्षम कार्यकर्ताओं को उचित जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
क्षेत्र के किसान पूछ रहे हैं कि आरएलपी ने स्थानीय स्तर पर उनके लिए क्या किया? इस पर आपका क्या कहना है?
-आरएलपी सुप्रीमो व सांसद हनुमान बेनीवाल जब किसानों के हक की बात करते हैं, तो वह केवल नागौर तक सीमित नहीं होती; वे पूरे राजस्थान और देश के किसानों की आवाज उठाते हैं। संसद में उन्होंने हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के किसानों के मुद्दों को कई बार प्रखरता से उठाया है। वे पहले भी यहां आते रहे हैं और आगे भी आएंगे। हां, यह जरूर है कि अब हमें स्थानीय स्तर पर और अधिक सक्रिय होना पड़ेगा। सांसद बेनीवाल अब हर दो माह में हनुमानगढ़ का दौरा करेंगे, सीधे जनता से संवाद करेंगे और 2028 तक यहां एक मजबूत जनाधार तैयार करेंगे।
आप मुंडवा निकाय में 4 बार बोर्ड बनाने में सफल रहे, लेकिन पिछला निकाय चुनाव काफी चर्चा में रहा। उस अनुभव को कैसे देखते हैं?
-इतिहास में वह पहला ऐसा चुनाव था, जहां मौजूदा सरकार ने येन-केन-प्रकारेण सत्ता हथियाने का खुला खेल खेला। पुलिस और प्रशासन को ‘बीजेपी ‘एजेंट’ की तरह इस्तेमाल किया गया। मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया गया मानो मैं कोई आतंकवादी होऊं, हालांकि अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह राजस्थान की राजनीति के लिए कतई सुखद संकेत नहीं है। आने वाले चुनावों में विपक्ष को सत्ता के ऐसे रवैये से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।






