



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में राठीखेड़ा चक 5 आरके में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने रविवार को फैक्ट्री स्थल का निरीक्षण किया। समिति ने संभावित भू-जल प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों की जांच के लिए तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी बीच किसानों ने 7 जनवरी को संगरिया में महापंचायत आयोजित कर आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी कर ली है। प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री से जुड़ी आपत्तियों को देखते हुए गठित समिति के सदस्य राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता अरविन्द अग्रवाल, भू-जल विभाग के मुख्य अभियंता सूरजभान, केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण के वैज्ञानिक शैलेंद्र सिंह तथा अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदी लाल मीना टिब्बी पहुंचे। समिति ने राठीखेड़ा चक 5 आरके स्थित फैक्ट्री स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर में मौजूद बोरवेलों से भू-जल के नमूने एकत्र किए गए। इसके साथ ही भू-जल स्तर का मापन भी किया गया। समिति ने फैक्ट्री के आसपास लगे ट्यूबवेलों से भी भू-जल के नमूने लेकर जल स्तर और गुणवत्ता की स्थिति का आकलन किया। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि प्रस्तावित फैक्ट्री से क्षेत्र के भू-जल संसाधनों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है या नहीं।
मौका निरीक्षण के बाद उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने टिब्बी स्थित एसडीएम कार्यालय में संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में संघर्ष समिति के सदस्यों ने फैक्ट्री से होने वाले संभावित भू-जल प्रदूषण, जल स्तर में गिरावट, कृषि भूमि पर दुष्प्रभाव और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर अपनी आशंकाएं विस्तार से सामने रखीं।
समिति के सदस्यों ने संघर्ष समिति को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी आपत्तियों और मांगों पर तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गहन परीक्षण किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि परीक्षण के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, ताकि सरकार ठोस और निष्पक्ष निर्णय ले सके।
गौरतलब है कि 12 दिसंबर को संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित हुई थी। उसी बैठक में एथेनॉल फैक्ट्री से जुड़े विवाद के समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद 16 दिसंबर को औपचारिक रूप से पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
इधर, प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 7 जनवरी को संगरिया में प्रस्तावित किसान महापंचायत को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधि गांवों का दौरा कर रहे हैं। वे ग्रामीणों को फैक्ट्री से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में जानकारी दे रहे हैं और आंदोलन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। किसान प्रतिनिधियों का साफ कहना है कि वे किसी भी स्थिति में एथेनॉल प्लांट को मंजूरी नहीं देंगे। किसानों का आरोप है कि यह परियोजना क्षेत्र के सीमित भू-जल संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के प्रबंधन ने मौजूदा हालात में टिब्बी के पास फैक्ट्री स्थापित करने में असमर्थता जता दी है। प्रबंधन की ओर से सरकार को पत्र लिखकर यह आरोप लगाया गया है कि परियोजना के लिए अनुकूल और सुरक्षित माहौल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। पत्र में यह भी संकेत दिया गया है कि वे फैक्ट्री को किसी अन्य राज्य में स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मौका निरीक्षण और बैठक के दौरान टिब्बी एसडीएम सत्यनारायण सुथार, जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता रामा किशन, भू-जल वैज्ञानिक बरकत अली, तहसीलदार हरीश टाक, सुखजीत सिंह चड्ढा, महंगा सिंह, इन्द्रजीत सिंह पन्नीवाली, नितिन ढाका, सुधीर सारण, बलजिंद्र बराड़ सहित संघर्ष समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
अब पूरे मामले की दिशा उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर निर्भर है। रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। वहीं किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी आशंकाओं का समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। टिब्बी क्षेत्र में यह मुद्दा अब सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना का नहीं, बल्कि पानी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है।




