


ग्राम सेतु ब्यूरो.
नई खुंजा स्थित वार्ड नं. 3 में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर बाबा साहेब के विचारों और संघर्षों को स्मरण किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन का उद्देश्य सामाजिक समरसता, समानता और संविधानिक मूल्यों के प्रति जन-जागरूकता को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद प्रतिनिधि मनोज बड़सीवाल ने कहा कि आज का दिन भारतीय संविधान के निर्माता के सम्मान में समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबा साहेब का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समान अधिकार और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, शायद पहले से ज़्यादा।
पूर्व प्रधानाध्यापक कमल भाटी ने बाबा साहेब के बचपन के संघर्षों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि महार जाति में जन्म के कारण उन्हें विद्यालय में कक्षा से बाहर बैठना पड़ता था, पानी की बोतल स्वयं लानी पड़ती थी और चपरासी के अभाव में प्यासे रहना पड़ता था। अपमान और भेदभाव के बीच पला-बढ़ा यह बालक आगे चलकर संविधान का शिल्पकार बना, यह कहानी नहीं, इतिहास का कठोर सत्य है। यही संघर्ष हमें सिखाता है कि शिक्षा और धैर्य किसी भी दीवार को गिरा सकते हैं।
समाजसेवी देवीलाल वर्मा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने गरीब, पिछड़े और दबे-कुचले वर्गों को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल काग़ज़ नहीं, यह सामाजिक अनुबंध है, जो हर नागरिक को बराबरी की दृष्टि से देखता है। वर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान को पढ़ें, समझें और उसके मूल्यों को जीवन में उतारें। कानून किताब में रहे तो धूल खाता है, जीवन में आए तो इतिहास बनाता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और संविधानिक मर्यादाओं की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया। माहौल गंभीर था, लेकिन उम्मीदों से भरा, जैसा होना चाहिए।
इस अवसर पर देवीलाल वर्मा, मामराज परिहार, विकास भारतीय, अर्जुन यादव, चम्पालाल, कृष्णलाल गोयल, कमल भाटी, एडवोकेट दीपक चलाना, अमन गिल, राधेश्याम, दलीप शेखावत, उदयपाल शर्मा, कृष्ण पेंटर, सोनू वर्मा, मनोज वर्मा, खेमचंद मेघवाल, डॉ. अशोक खाम्बरा, दीपू नाई, विनोद गोदारा, अमरपाल, ऋषि दुष्यंत स्वामी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को कर्म में बदलने से ही दी जा सकती है। बराबरी की बात मंच तक सीमित न रहे, गली, स्कूल और दफ्तर तक पहुँचे। यही परंपरा है, यही रास्ता है, और यही सच्चा सम्मान।






