





ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी के हनुमानगढ़ दौरे के दौरान गुरुवार को सर्किट हाउस परिसर में उस समय दिलचस्प और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब भाजपा नेता अमित चौधरी ने किसान नेता सुभाष मक्कासर को अपनी कुर्सी सौंप दी और स्वयं किसानों के बीच जमीन पर बैठ गए। उनकी इस पहल के बाद मौके पर मौजूद किसानों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ और माहौल संवाद की दिशा में आगे बढ़ा।
दरअसल, किसान आयोग अध्यक्ष सीआर चौधरी ने प्रशासन के माध्यम से भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका को एसकेडीयू में प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के लिए बुलाया था। जबकि माणुका ने साफ कहा कि प्रतिनिधियों के बजाय सभी किसानों के बीच खुली बातचीत होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर सर्किट हाउस परिसर में काफी देर तक तनातनी का माहौल बना रहा। किसानों ने नारेबाजी करते हुए सामूहिक संवाद की मांग उठाई।
स्थिति को संभालने के लिए एसडीएम मांगीलाल सुथार और डीएसपी मीनाक्षी सहारण ने किसानों से लगातार समझाइश की। प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत का दौर चलता रहा। इसके बाद किसान आयोग अध्यक्ष सीआर चौधरी भाजपा नेता अमित चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू और भाजपा नेता देवेंद्र अग्रवाल के साथ किसानों के बीच पहुंचे। वहां आयोग अध्यक्ष ने किसानों की समस्याएं सुनीं और अपनी बात भी रखी।
इसी दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु बना दिया। भाजपा नेता अमित चौधरी मंच पर अन्य नेताओं के साथ कुर्सी पर बैठे थे। तभी किसान नेता सुभाष मक्कासर सामने आए। अमित चौधरी तुरंत अपनी कुर्सी से उठे और वह कुर्सी मक्कासर को बैठने के लिए दे दी। इसके बाद वे स्वयं किसानों के बीच नीचे जमीन पर बैठ गए। मौके पर मौजूद किसानों ने इस व्यवहार को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा और कुछ देर पहले तक मौजूद तनाव का माहौल काफी हद तक सामान्य हो गया। सनद रहे, सुभाष मक्कासर पूर्व सांसद शोपत सिंह मक्कासर के बेटे हैं और आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी।
इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका ने किसानों की ओर से चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें डिग्गी निर्माण की लंबित अनुदान राशि का शीघ्र भुगतान, गेहूं खरीद धांधली में निर्दाेष किसानों को राहत तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, धान की सरकारी खरीद शुरू करना और 15 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच मूंग की सरकारी खरीद प्रारंभ करने की मांग शामिल रही।
संवाद के दौरान रेशम सिंह माणुका ने भाजपा नेता अमित चौधरी की ओर मुखातिब होकर कहा कि सरकार आपकी है और आप क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए किसानों को एक निश्चित तारीख बताई जाए। उन्होंने कहा कि यदि उस तारीख तक किसानों को राहत नहीं मिली तो किसान आपके घर पहुंचेंगे। इस पर अमित चौधरी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘आपका घर है, कभी पधारो।’ उनके इस जवाब पर मौके पर मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान भी देखने को मिली।
किसान आयोग अध्यक्ष सीआर चौधरी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान आयोग सरकार और किसानों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करता है। उन्होंने बताया कि वे किसानों की समस्याओं को जानने के लिए प्रदेशभर का दौरा कर रहे हैं और अब तक 22 जिलों के किसानों से संवाद कर चुके हैं। सभी जिलों से मिले सुझावों और समस्याओं का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि आवश्यक निर्णय लेकर किसानों को राहत दी जा सके।
उन्होंने कहा कि डिग्गी निर्माण अनुदान राशि के भुगतान को लेकर वे हाल ही में केंद्रीय मंत्री से भी मिले हैं और उन्हें उम्मीद है कि लंबित भुगतान जल्द जारी होगा। वहीं मूंग की सरकारी खरीद को लेकर उन्होंने एक अक्टूबर से खरीद शुरू कराने का भरोसा भी किसानों को दिलाया।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में सीआर चौधरी ने कहा कि सरकारी प्रक्रियाओं में समय लगता है, इसलिए किसी निश्चित समय-सीमा या डेडलाइन की घोषणा करना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की सभी मांगों को गंभीरता से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
किसानों के विरोध और संभावित तनाव को देखते हुए पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मौके पर एएसपी अरविंद बिश्नोई, एसडीएम मांगीलाल सुथार, डीएसपी मीनाक्षी सहारण सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि अंततः बातचीत और संवाद के जरिए माहौल शांतिपूर्ण बना रहा और किसानों ने अपनी मांगें विस्तार से आयोग अध्यक्ष के समक्ष रखीं।








