




ग्राम सेतु ब्यूरो
राजस्थान सरकार प्रदेश की ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग (2026-27 से 2030-31) की सिफारिशों के अनुरूप पंचायतों की स्वयं की आय बढ़ाने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। इसके तहत घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, पानी के बिल, पट्टों, मोबाइल टावरों, खनन, सोलर और विंड ऊर्जा परियोजनाओं सहित कई नए स्रोतों से राजस्व जुटाने पर जोर दिया जाएगा।
प्रदेश में 14,403 ग्राम पंचायतें, 457 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषदें हैं। वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रति परिवार प्रतिवर्ष औसतन 1,200 रुपए की स्वयं की आय अर्जित करनी होगी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पंचायतों को नए राजस्व स्रोत विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम-1994 और पंचायती राज नियम-1996 के तहत अब ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की प्रत्येक साधारण बैठक के एजेंडे में स्वयं की आय बढ़ाने का विषय अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। बैठकों में पंचायत की आय का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत होगा और जनप्रतिनिधियों की मंजूरी से नए राजस्व प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
सरकार ने इस व्यवस्था की सख्त निगरानी का भी प्रावधान किया है। जिला परिषदें हर महीने अधीनस्थ ग्राम पंचायतों की आय की समीक्षा कर पंचायती राज विभाग को रिपोर्ट भेजेंगी। साथ ही ई-पंचायत पोर्टल पर दर्ज आय के आंकड़ों का डिजिटल और भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। यदि कोई पंचायत निर्धारित राजस्व लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती है तो उसके विकास कार्यों के लिए मिलने वाले फंड में 20 प्रतिशत तक कटौती की जा सकती है।
पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए कई नए विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कचरा संग्रहण शुल्क लिया जाएगा, जो प्रति प्रतिष्ठान करीब 300 रुपए तक हो सकता है। मोबाइल टावरों पर 10 हजार रुपए तक का टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। पंचायत मुख्यालयों पर दुकानों का निर्माण कर किराया वसूला जाएगा तथा समय-समय पर किराए में वृद्धि भी की जा सकेगी।
इसके अलावा तीर्थस्थलों पर आने वाले वाहनों और यात्रियों से शुल्क वसूलने, जल जीवन मिशन के पानी के बिल के साथ पंचायत विकास शुल्क जोड़ने, चारागाह भूमि और वन उपज से आय बढ़ाने, 300 गज से बड़े पट्टों पर डीएलसी दर का 25 प्रतिशत शुल्क सख्ती से लागू करने तथा आवासीय भूमि के व्यावसायिक उपयोग पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
खनन परियोजनाओं से सीएसआर राशि अथवा प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपए तक की आय प्राप्त करने और सोलर व विंड ऊर्जा परियोजनाओं पर अलग टैक्स या शुल्क लगाने की भी योजना है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वे विकास कार्यों के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के आधार पर स्थानीय विकास को गति दे सकेंगी।






