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सुंदरकांड की चौपाइयों से गूंजता वृद्धाश्रम का वातावरण, भजनों की धुन पर तालियां बजाते बुजुर्ग और कुछ देर के लिए उम्र की थकान भूलकर झूमते चेहरे… हनुमानगढ़ टाउन स्थित ‘अपना घर वृद्धाश्रम’ में माहौल कुछ ऐसा ही आत्मीय नजर आया। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन सम्मान दिवस पर सशक्त नारी संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बुजुर्गों के साथ केवल औपचारिक सम्मान नहीं हुआ, बल्कि उन्हें समय दिया गया, उनकी बातें सुनी गईं और उनके साथ खुशियां साझा की गईं। सुंदरकांड पाठ के बाद जब बुजुर्गों का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा कर और चादर ओढ़ाकर सम्मान किया गया तो उनके चेहरों पर अपनत्व और खुशी साफ नजर आई।
सुंदरकांड के पाठ के दौरान वृद्धजनों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। भजनों और धार्मिक वातावरण में कुछ बुजुर्ग झूमते हुए भी नजर आए। कार्यक्रम के अंत में सभी वृद्धजनों का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा कर एवं चादर ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इस दौरान उनके साथ बातचीत की गई और उन्हें अपनत्व का एहसास कराया गया।
सशक्त नारी संस्थान की अध्यक्ष डॉ. मिताली अग्रवाल एडवोकेट ने कहा कि हमारे बुजुर्ग हमारे अनुभव और संस्कारों की धरोहर हैं। परिवार में माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ ही समाज में रहने वाले ऐसे बुजुर्ग, जो वृद्धाश्रम में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उनके लिए भी हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में दानदाताओं और समाजसेवियों द्वारा समय-समय पर भोजन, कपड़े, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। लेकिन इन सुविधाओं के साथ बुजुर्गों को हमारे समय, बातचीत और अपनत्व की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। जब भी वे वृद्धाश्रम जाती हैं, उन्हें महसूस होता है कि यहां रहने वाले बुजुर्गों के पास आवश्यक सुविधाएं तो हैं, लेकिन उनके साथ बैठकर कुछ समय बिताने और उनकी बातें सुनने वाले लोगों की कमी रहती है।
डॉ. मिताली अग्रवाल ने कहा कि यदि हम अपने व्यस्त जीवन में से थोड़ा-सा समय निकालकर समय-समय पर वृद्धाश्रम जाएं, बुजुर्गों के पास बैठें, उनसे बातचीत करें और उनके साथ खुशियां साझा करें, तो यह उनके लिए किसी बड़ी सेवा से कम नहीं होगा। किसी बुजुर्ग को दिया गया हमारा थोड़ा-सा समय भी उनके दिन को खुशी से भर सकता है। उन्होंने कहा कि सशक्त नारी संस्थान आगे भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताने, उनका सम्मान करने और उन्हें अपनत्व का एहसास कराने के प्रयास जारी रखेगा।
कार्यक्रम में संरक्षक सरोज अग्रवाल, श्वेता बब्बर, दीपमाला गीर, नवीन बारोटिया, पूजा मित्तल, गुंजन गजरा, कौशल्या वर्मा, रीता गेरा, रूपाली कालरा, मीनू कालरा, उर्मिला दुरिया एवं मीना गर्ग सहित संस्थान के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।





