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घोष के वाद्ययंत्रों की गूंजती ताल, एक लय में उठते कदम और हवा में लहराता भगवा ध्वज, विजयादशमी के पावन अवसर पर हनुमानगढ़ अनुशासन और शौर्य के अभूतपूर्व दृश्य का साक्षी बना। ऐतिहासिक भटनेर किले की प्राचीरों के सामने स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मैदान से जब पूर्ण गणवेश में सुसज्जित सैकड़ों स्वयंसेवक एक कतार में कदमताल करते हुए निकले, तो पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के स्पंदन से भर उठा। हाथों में दंड, सीने में राष्ट्रभक्ति का अटूट संकल्प और चेहरे पर अटूट गंभीरता लिए जब स्वयंसेवकों का यह अनुशासित कारवां नगर परिषद, महाराणा प्रताप चौक और सुभाष चौक से होकर गुजरा, तो शहर की सड़कों पर आस्था और आदर का जनसैलाब उमड़ पड़ा। छतों और बालकनियों से नगरवासियों ने 200 किलो फूलों की वर्षा कर इस पदयात्रा को एक उत्सव में बदल दिया; 50 से अधिक स्वागत द्वारों और सामाजिक संगठनों के जयकारों के बीच यह पथ संचलन केवल एक रैली नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, शक्ति और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत संगम बनकर उभरा। इसमें हनुमानगढ़ नगर के सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात् अवतरण एवं काव्यगीत प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. संतोष राजपुरोहित थे। इस अवसर पर हनुमानगढ़ जिला संघचालक मोमनचंद मित्तल, नगर संघचालक अनिल अग्रवाल तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जोधपुर प्रांत के धर्म जागरण प्रमुख देवेंद्र प्रकाश उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि संतोष राजपुरोहित ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल सामाजिक सुधार का विचार नहीं, बल्कि समरस, संस्कारित और सतत विकसित भारत के निर्माण का मार्ग है। सामाजिक समरसता के माध्यम से हम जाति, वर्ग तथा ऊँच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान दे सकते हैं। यह भारतीय दर्शन के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव को साकार करता है। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन परिवार में संस्कारों, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ बनाने का माध्यम है, क्योंकि सशक्त परिवार से ही सशक्त समाज का निर्माण होता है। भारतीय दर्शन प्रकृति को पूजनीय मानता है। इसलिए जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता का संरक्षण सतत विकास की अनिवार्य शर्त है। ‘स्व’ का बोध हमें अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान-परंपरा पर गर्व करते हुए आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक को अपनाने की प्रेरणा देता है। इसी प्रकार नागरिक कर्तव्यों का पालन, अनुशासन, ईमानदारी, कानून का सम्मान तथा सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। एक शिक्षक के रूप में उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि अच्छे नागरिकों, संवेदनशील मनुष्यों और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी पीढ़ी का निर्माण करना भी है। भारतीय दर्शन का मूल भाव प्रकृति के साथ संतुलन, समाज के साथ समरसता और जीवन में कर्तव्यबोध है। यदि हम पंच परिवर्तन के इन पाँचों आयामों को अपने व्यक्तिगत जीवन, परिवार, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक व्यवहार में अपनाएँ, तो विकास केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह मानवीय, नैतिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ भी बनेगा। यही पंच परिवर्तन की भावना और भारतीय दर्शन की प्रेरणा से सतत विकास की दिशा में हमारा सार्थक योगदान होगा।
मुख्य वक्ता देवेंद्र प्रकाश ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन हमें यह संदेश देता है कि शक्ति का उद्देश्य दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि अन्याय का प्रतिकार करना, धर्म की रक्षा करना और समाज में शांति एवं संतुलन बनाए रखना है। भारतीय परंपरा में शस्त्र केवल युद्ध का साधन नहीं, बल्कि साहस, आत्मरक्षा, कर्तव्य और न्याय का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि श्रीराम की रावण पर विजय हमें सिखाती है कि शक्ति जब सत्य, मर्यादा और नैतिकता के साथ जुड़ती है, तभी वह लोककल्याण का माध्यम बनती है। शक्ति के बिना शांति की रक्षा कठिन है और विवेक के बिना शक्ति का उपयोग विनाशकारी हो सकता है। इसलिए शक्ति और संयम, साहस और विवेक तथा अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन आवश्यक है। यही संतुलन समाज में सुरक्षा, स्थिरता और विश्वास स्थापित करता है। नेतृत्व के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शक्ति का अर्थ केवल पद, अधिकार या संसाधन नहीं है, बल्कि निर्णय लेने का साहस, संकट में धैर्य, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की क्षमता और दूसरों को साथ लेकर चलने का गुण भी है। एक सच्चा नेता अपनी शक्ति का उपयोग व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करता है। विजयादशमी हमें प्रेरणा देती है कि हम शक्तिशाली बनें, लेकिन शक्ति के साथ विनम्रता, अनुशासन और नैतिकता को भी अपनाएँ। सच्चा नेतृत्व वही है, जो शक्ति से सुरक्षा, साहस से विश्वास और अपने आचरण से समाज में संतुलन स्थापित करे।
मुख्य वक्ता के बौद्धिक के पश्चात् हनुमानगढ़ नगर के स्वयंसेवकों ने घोष की धुन पर अनुशासनबद्ध तरीके से नगर के प्रमुख मार्गों से पथ संचलन किया। पथ संचलन किले वाले हाई स्कूल के खेल मैदान से प्रारंभ होकर नगर परिषद, महाराणा प्रताप चौक, पंचायत समिति, पंजाब नेशनल बैंक, जाकिर हुसैन पार्क, सुभाष चौक, इंदिरा चौक, महाराजा अग्रसेन चौक, लालाजी चौक, प्राकृतिक चिकित्सालय, ट्रैफिक थाना मुख्य मार्ग तथा बाबा सुक्खा सिंह-महताब सिंह गुरुद्वारे के सामने से होते हुए पुनः कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हनुमानगढ़ जिला प्रचार प्रमुख चेतन जिंदल ने बताया कि पथ संचलन को लेकर नगर में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। नगर के 50 से अधिक सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों ने पथ संचलन का स्वागत किया। इसके लिए संचलन मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर 50 से अधिक स्वागत द्वार लगाए गए। समाज के लोगों ने लगभग 200 किलोग्राम फूलों से पुष्पवर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया।
हनुमानगढ़ जिला कार्यवाह नीरज कुमार ने स्वयंसेवकों से राष्ट्रहित को सर्वाेपरि मानते हुए समाज में संगठन, अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने तथा भविष्य में भी ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ निरंतर कार्य करने का आह्वान किया। हनुमानगढ़ नगर कार्यवाह अमित कुमार ने स्वयंसेवकों से राष्ट्रसेवा के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रभक्ति के संस्कारों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।





