




रजनी शर्मा
तुम्हारे तप से आज हर आँगन में चाँद उतरता है,
हर सुहागन का मन, श्रद्धा में भीगकर निखरता है।
पर उस तप का मोल कहाँ कोई जान पाता,
जिसे ईश्वर ही हर क्षण, मौन में पहचान पाता।
वो सहती है आँधियाँ, मगर दीप नहीं बुझने देती,
हर कठिन राह में भी प्रेम की जोत जलाए रहती।
सुबह से संध्या तक, मौन व्रत का गीत रचती,
हर साँस में अपने प्रिय का नाम सदा रचती।
बस एक ही प्रार्थना उसके मन में सदा समाई,
कि डोली में आए, और अर्थी पर ही जाए विदाई।
करवा चौथ केवल व्रत नहीं, एक आस्था का विश्वास है,
हर सुहागन के हृदय में बसा अखंड उपवास है।





