




ग्राम सेतु ब्यूरो.
नीट-2026 पेपर लीक के बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलनों और युवाओं की नाराजगी के बीच भारतीय जनता पार्टी अब डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। आंदोलन की तपिश पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई है, कई राज्यों में प्रदर्शन और गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे समय में भाजपा ने सीधे युवाओं, खासकर नीट परीक्षार्थियों और उनके परिवारों से संवाद स्थापित करने का फैसला किया है।
भाजपा ने इस अभियान की जिम्मेदारी अपने महिला मोर्चा को सौंपी है। पार्टी का उद्देश्य नीट परीक्षार्थियों और उनके परिवारों की समस्याएं, सुझाव और अनुभव सीधे सुनना तथा उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाना बताया जा रहा है। इसे आगामी चुनावों से पहले युवाओं के बीच विश्वास बहाली की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानती श्रीनिवासन ने सभी पदाधिकारियों को भेजे पत्र में इस अभियान को ‘आत्मीय और अनौपचारिक संवाद’ बताया है। वहीं राजस्थान की प्रभारी लतिका शर्मा का कहना है कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों से संवाद स्थापित करने का प्रयास है।
रणनीति के अनुसार प्रत्येक मंडल में कम से कम एक नीट-2026 परीक्षार्थी के घर जाकर उसके परिवार से मुलाकात करना अनिवार्य किया गया है। इस दौरान पदाधिकारी छात्रों की समस्याएं, सुझाव और अनुभव सुनेंगे। परिवार की सहमति मिलने पर मुलाकात की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की जाएगी।
पूरे अभियान की निगरानी के लिए प्रत्येक राज्य में प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। राजस्थान में इसकी जिम्मेदारी लतिका शर्मा को दी गई है, जबकि प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष राखी राठौड़ अभियान की मॉनिटरिंग कर रही हैं। अभियान पूरा होने के बाद सभी प्रभारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट, सुझाव और फोटोग्राफ राष्ट्रीय महिला मोर्चा कार्यालय को सौंपेंगे, ताकि उन्हें केंद्र सरकार और पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद युवाओं में पैदा हुई नाराजगी को कम करना भाजपा के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में पार्टी सीधे संवाद के जरिए युवाओं का भरोसा दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही है। आने वाले चुनावों के मद्देनजर ‘जेन-जी’ यानी नई पीढ़ी के मतदाताओं तक पहुंच बनाना भी इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के इस अभियान पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता रामेश्वर चांवरिया ने इसे ‘सिर्फ राजनीतिक नाटक’ बताया है। उनका आरोप है कि नीट आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ हुए व्यवहार, गिरफ्तारियों और केंद्र सरकार की भूमिका को देश देख चुका है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर कार्रवाई हुई, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई।
चांवरिया ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव किया, जबकि छात्रों की पीड़ा को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने भाजपा सांसदों के कुछ बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के साथ हुई घटनाओं को लोग भूले नहीं हैं। उनके अनुसार केवल घर-घर जाकर संवाद करने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा।
भाजपा का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके सुझावों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे आगामी चुनावों से पहले युवाओं को साधने की कोशिश बता रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल युवाओं के बीच भरोसा कायम कर पाती है या राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बनकर रह जाती है।







