




ग्राम सेतु ब्यूरो.
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को ओडिशा के तालाबीरा-कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े कथित कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ वर्ष 2015 में जारी समन आदेश को रद्द करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही इस मामले में उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई।
यह फैसला डॉ. मनमोहन सिंह के 26 दिसंबर 2024 को हुए निधन के लगभग दो वर्ष बाद आया है। उस समय उनकी आयु 92 वर्ष थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर मामले में संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था। चूंकि अपीलकर्ता का निधन हो चुका है, इसलिए अपील को निष्फल मानते हुए समाप्त किया जाता है।
मामला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में ओडिशा के तालाबीरा-कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस दौरान डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। आरोप लगाया गया था कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को कोयला ब्लॉक आवंटित करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। सीबीआई ने मामले की जांच के बाद अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन चलाने योग्य मामला नहीं बनता। जांच एजेंसी ने अदालत से मामले को बंद करने की अनुमति मांगी थी।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद मार्च 2015 में दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया। तत्कालीन विशेष न्यायाधीश भारत पराशर ने प्रथम दृष्टया मामला बनता मानते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख सहित छह आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, धारा 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोपी के रूप में तलब किया था। अदालत ने सीबीआई को तत्कालीन प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ के निर्देश भी दिए थे।
ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि जब स्वयं जांच एजेंसी ने अभियोजन योग्य कोई अपराध नहीं पाया, तब समन जारी करना न्यायसंगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में ट्रायल कोर्ट के समन आदेश पर रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा।
करीब दस वर्षों तक लंबित रहने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए समन आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर मामले में संज्ञान लेने का कोई ठोस आधार नहीं था। इस फैसले के साथ ही तालाबीरा-कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ सभी कानूनी कार्यवाही का औपचारिक अंत हो गया।







