






ग्राम सेतु ब्यूरो
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी रक्षा और उन्हें वास्तविक लाभ दिलाने की मांग को लेकर विप्र फाउंडेशन, जिला हनुमानगढ़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजा है। संगठन ने राज्य सरकार से पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ राज्य स्तर पर स्वतंत्र एवं सशक्त ईडब्ल्यूएस आयोग के गठन की मांग की है।
जिलाध्यक्ष कालूराम शर्मा की ओर से प्रेषित ज्ञापन में कहा गया है कि भारत के संविधान के 103वें संविधान संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शिक्षा और सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक अधिकार दिया गया है। इस प्रावधान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। हालांकि, व्यवहारिक स्तर पर आज भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कई स्थानों पर पात्रता के निर्धारण, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, आय सीमा की व्याख्या तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण वास्तविक पात्र नागरिक अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
विप्र फाउंडेशन ने अपनी पहली प्रमुख मांग में कहा है कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए आगामी पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को उपयुक्त प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण का प्रावधान किया जाए, ताकि यह वर्ग स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में भी अपनी प्रभावी भूमिका निभा सके और निर्णय प्रक्रिया में उसकी भागीदारी सुनिश्चित हो।
ज्ञापन में दूसरी महत्वपूर्ण मांग राज्य स्तर पर स्वतंत्र ईडब्ल्यूएस आयोग के गठन की की गई है। संगठन का कहना है कि एक सशक्त आयोग बनने से ईडब्ल्यूएस वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों का व्यवस्थित समाधान संभव होगा। आयोग समय-समय पर आय सीमा एवं पात्रता मानकों की समीक्षा कर सकेगा, प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आवश्यक सुझाव देगा तथा आरक्षण व्यवस्था और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।
इसके अलावा आयोग पात्र नागरिकों की शिकायतों का त्वरित एवं निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करने के साथ-साथ राज्य सरकार को समय-समय पर आवश्यक नीतिगत सुझाव भी उपलब्ध करा सकेगा। संगठन का मानना है कि इससे ईडब्ल्यूएस वर्ग के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा होगी और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा।
विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें न्याय और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ज्ञापन में शामिल मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएं। संगठन ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इस विषय में सकारात्मक पहल करेगी और प्रदेश के लाखों आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने स्पष्ट किया कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए संवैधानिक प्रावधानों का लाभ तभी सार्थक होगा, जब उनकी जमीनी स्तर पर प्रभावी पालना सुनिश्चित हो और पात्र परिवारों को बिना किसी अनावश्यक बाधा के उनके अधिकार प्राप्त हो सकें। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष कालूराम शर्मा, एलडी तावणियां, डॉ. भारतभूषण शर्मा, युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सचिन कौशिक, हंसराज शर्मा, बलदेव सारस्वत, गोपाल शर्मा शेरू, नरेश पुरोहित, लोकेश शर्मा,गिरधारीलाल सारस्वत आदि शामिल थे।








