




रूंख भायला
राजी राखै रामजी ! आज बात ‘जेन-जी’ री, बां री जिद री, जीत रै जैकारां री। जैकारा इण बात रा कै जेन-जी गांधी रै देस में लोकराज री लाज राखी है, अर रखाई है। बां दुनिया सामीं अेक ठावो सनेसो दियो है, कै राज कित्तो ई काठै काळजै रो होवै, मोट्यारां सामीं छेवट उण नै झुकणो ई पड़ै।
आज घड़ी भारत दुनिया रो सैं सूं जवान देस गिणीजै, मतलब अठै री आबादी में मोट्यारां री संख्या जादा है। पण साची बात तो आ कै, जवान होवतै टाबरां नै, बै चायै छोरा होवै का छोरियां, आपां जूं जित्तो ई नीं गिणां। घर में, परिवार में, समाज में बडेरा बां री बातां सदांई आ कैय’र बिसरा देवै कै, आन्नै क्यां रो ठाह है ! आन्नै कांई पूछणो है ! टाबर ई लाई बडेरां सामीं के बोलै, बोलतां ई तो रोळो पड़ज्यै, ‘सामीं और बोलै है !’ आ ई आपणी परम्परागत समाजू सोच है, आ ई राजनीतिक दीठ है। जणाई राजनीतिक पारट्यां मोट्यारां नै सदांई आपरै फायदै सारू बरतती रैयी है।
पण अबै बगत बदळग्यो है, ओ जुग जेन-जी रो है। इंटरनेट अर सोसियल मीडिया रै इण जुग में मोट्यारां री आ नवी पीढी जेन-जी रै नांव सूं बजै। आपणै ई देस रा जाया जलम्या अे टाबर पारम्परिक मोट्यारां सूं साव न्यारा, जियाजूण में भींचाभांची नीं जाणै, खुल’र जीवण में भरोसो राखै। मायत हो चायै सरकार, कैवता नीं संकै। खावण-पीवण सूं लेय’र आं री भासा अर पैराव ई कीं अलायदो होग्यो है। अे खुल’र हांसै, धाप‘र रोवै, रागळी करै, तुकबंदी करै, गाळ काडता नीं संकै। देर रात तंई जागणो, बातां सूं बेसी ‘चैटिंग’, न्यारी सबदावली, जिकी आप समझ ई नीं सको। ‘ब्रेकअप’ अर ‘लिव इन’ आं रै सारू अपरोगी बात कोनी। अपरोगी बात तो आ, कोई म्हानै ऊकचूक कियां कैय सकै है !
रांगड़ नै तो रैकारै री गाळ ! बस बात लागगी, देस री सैं सूं मोटी अदालत रै मुखिया अेक दिन आं मोट्यारां बाबत कठैई कैय दियो, देस में कीं ‘कांक्रोच’ सिरखै मोट्यारां री अेक जमात है जिकी लोकराज में घुण रो काम कर रैयी है।
सीजेआई सूर्यकांत रो इत्तो कैवणो होयो, कै बात सात समदर पार यूएस बैठ्यै देस रै अेक मोट्यार रै काळजै लागगी। देस री व्यवस्था मोट्यारां नै ‘कांक्रोच’ जित्तो ई नीं गिणै इण सूं नाजोगी बात और पछै कांई ! बस, बण अभिजीत दीपके सोसियल मीडिया पर ‘कांक्रोच जनता पार्टी’ रै नांव सूं अेक वेबसाइट बणाई अर आपरै मन री बात उण पर घाल दी। अपील ई करदी कै जे कोई उण री बात पर हंकारो भरै तो वेबसाइट नै फॉलो करै। इचरज री बात आ, कै मोदी जी रै मन री बात तो लारै रैयगी अर रातूंरात ‘कांक्रोच जनता पार्टी’ रै साथै करोड़ूं छोरा-छोरियां जुड़ग्या। दो-चार दिन फगत बातां ई चालती रैयी कै इयां ई है, कीं कोनी। इसी पारट्यां कांई ठाह कित्ती आई अर कित्ती गई। पण बिधना रा रंग देखो, ‘कांक्रोच जनता पार्टी’ तो साठी मोठां सूं ई बेगी पांघरी, अर सगळां री चावी बणगी।
नीट पेपरलीक रै मामलै में जद बीस उरमावान टाबरां आत्मघात कर आपरी जान दे दी तो आखै देस री जनता सरकार अर भ्रष्ट शिक्षा मंत्री रै धोबां धोबां धूड़ घाली।
आ ‘कांक्रोच जनता पार्टी’ सरकार रै लारै इसी पड़ी कै मोदीजी रै ई आंख्यां करादी। जंतर-मंतर पर जद धरणो सरू होयो तो सब नै लागतो , के बटै है ! छोरा छंडा है, बांरै पल्लै के है ! पण ज्यूं-ज्यूं काळ चकरियो आगै बध्यो, भोत कीं बदळिजण लाग्यो।
देस री जेन-जी तो आपरै जज्बै अर जोस सूं भारत सरकार नै गुडाळियां पर ल्या दियो, अर बो ई गांधी रै अहिंसात्मक तौर तरीकां सूं। धिरजाई रो ओ रूप साव न्यारो अर निरवाळो। सरकार नै छेवट आं मोट्यारां री सगळी बातां मानणी पड़ी, जिकी सरकार अर बां रा पैरोकार कैया करता, इस्तीफा इयां थोड़ी होवै, बै आज सामीं पगां जाय’र इण जेन-जी आगै हाथ पाधरा कर दिया। आ ताकत है जेन-जी री, जिकी सोसियल मीडिया री मार्फत दुनिया रै सैं सूं मोटै लोकतंत्र में मोट्यारां नै अेक जाजम पर ल्या दियो। इण जाजम पर कोई धरम नीं, कोई जात नीं, कोई लिंगभेद नीं……, के छोरा अर के छोरियां, सगळा अेक सुर में इस्यो हाको कर यो कै सरकार ई हाल खड़ी होई, कठैई कोई ऊकचूक नीं हो जावै, कियां ई परोटो बातड़ी नै।
जंतर-मंतर पर चालतै आंदोलन में आ जेन-जी कूट ई घणी खाई, अबखायां ई भोत झेली पण के मजाल कै कोई मोळो पड़्यो होवै। मार खायां पछै तो छोरै-छोरियां मोदीजी नै गाळां ई जचा’र ठोकी, गोदी मीडिया नै चोखो जंतरायो, पुलिसआळां नै ई दिखा दियो कै थां सूं कूट खायां पछै ई म्है थारै सामीं मुळक’र पाछा खड़्या हो सकां। कदास जेन-जी री आ ई ताकत ही जिकी सरकार नै झुका दियो।
म्हूं सोचूं, अबै तो मोदीजी ई सीजेआई नै ओळमो देंवता होसी, ‘बेटी रा बाप, ऊकचूक बोल्यो थूं, फजीती होई म्हारी…। ना तू ‘कांक्रोच’ कैवतो, ना आ जेन-जी जागती। म्हारै तो बूढै बारै धौळां में धूड़ घलाई दी…टींगर-टींगर यां कांई ठाह कुण कुण सी गाळ ठोकी है मन्नै अर म्हारै मायतां नै !’
मोदीजी, बगत रैवतां चेतणो चाइजै, आप चेत्या तो सरी पण टाबरां री गाळां खाय’र। कवि कागद मुजब पाणी कदेई सीधो कंठां तंई नीं आवै, बो पगां सूं गळै तंई री जातरा आपरी मरजी सूं करै। इण में पाणी रो दोस कठै अर आप निरदोस कठै। पाणी आपरी जातरा में है, बध ई सी, बगतसर नीं चेत्या तो धौळां में धूड़ पड़ ई सी।
आज री हथाई रो सार ओ है….आछो कैवो चायै माड़ो, जेन-जी देस अर दुनिया रो भविख है। उण साथै बंतळ होवणी चाहीजै, उण री बात सुणनी चाहीजै। आज तो बै धिरजाई सूं आपरी बात कैय रैया है, कुण जाणै, आवतै बगत में बां रै मांय सूं कोई आपरा कंठ ई झाल सकै ! बाकी बातां आगली हथाई में…..। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं








