




ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में प्रस्तावित पंचायतीराज एवं नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सातों संभाग में तीन-तीन नेताओं की समिति बनाई गई है। यह समिति संभाग में प्रत्याशी चयन, संगठनात्मक समन्वय, चुनावी रणनीति और बूथ स्तर तक पार्टी संगठन को सक्रिय करने की जिम्मेदारी निभाएगी। भाजपा के इस कदम को बीकानेर संभाग में चुनावी अभियान को गति देने और संगठन को मजबूत आधार पर खड़ा करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदेश मुख्यालय की ओर से 25 जुलाई को जारी सूची में प्रत्येक संभाग के लिए तीन-तीन वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि ये समितियां प्रत्याशी चयन, चुनावी रणनीति, संगठनात्मक समन्वय और स्थानीय स्तर पर प्रचार अभियान की निगरानी करेंगी।
जारी सूची के अनुसार जयपुर संभाग की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया को सौंपी गई है। जोधपुर संभाग में धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी और पूर्व विधायक हेमराज मीणा को शामिल किया गया है।
भरतपुर संभाग के लिए वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरिराम रिणवा और पूर्व विधायक शंकर सिंह राजपूरोहित को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कोटा संभाग में सांसद सी. पी. जोशी, पूर्व सांसद अर्जुनलाल मीणा तथा पूर्व विधायक अजीत मेहता चुनाव संचालन का दायित्व संभालेंगे।
अजमेर संभाग की समिति में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा तथा पूर्व सांसद देवजी भाई पटेल को स्थान दिया गया है। उदयपुर संभाग में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व सांसद नारायण पंचारिया और पूर्व सांसद जसकौर मीणा को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बीकानेर संभाग में प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, जीव कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह विश्नोई तथा पूर्व सांसद संतोष अहलावत समिति का नेतृत्व करेंगे।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि चुनाव संचालन समितियों के गठन का उद्देश्य संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा प्रत्येक संभाग में चुनावी गतिविधियों की नियमित निगरानी करना है। वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ उठाते हुए भाजपा बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, स्थानीय मुद्दों पर रणनीति तैयार करने और चुनाव प्रबंधन को मजबूत बनाने पर जोर देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों से पहले भाजपा का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ने की तैयारी में है। प्रदेश नेतृत्व ने अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठनात्मक एकजुटता का संदेश भी देने का प्रयास किया है। अब इन समितियों की सक्रियता के साथ आगामी दिनों में विभिन्न संभागों में बैठकों, कार्यकर्ता सम्मेलन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।








