




रजनी शर्मा.
वह चिड़िया….
जो तिनका -तिनका चुनती है,
धैर्य की डोरी से
अपना छोटा सा संसार बुनती है।
वह चिड़िया…
ना आँधियों से घबराती है,
ना तपती धूप से हारती है,
हर बार बिखर जाने पर भी,
फ़िर नये होंसले से घोंसला संवारती है।
वह जानती है…
घर एक दिन में नही बनते,
विश्वास और प्रेम के
तिनके -तिनके से सजते है।
शायद इसलिए..
हर बार उसे देखकर,
जीवन यही सिखाता है..
गिरना अंत नही है,
हर बार उठकर
फ़िर से आशियाना बनाना ही,
जीवन का सबसे सुन्दर साहस है।







