





ग्राम सेतु ब्यूरो.
दिवंगत लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार ओम पुरोहित ‘कागद’ की स्मृति को समर्पित साहित्यिक आयोजन बुधवार को एसकेडी यूनिवर्सिटी में गरिमामय माहौल में हुआ। कागद फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े प्रबुद्धजनों ने कागद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए साहित्य की सामाजिक भूमिका पर विचार रखे। इस अवसर पर राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम साहित्यकार श्याम महर्षि, हिंदी साहित्य के लिए डॉ. पद्मजा शर्मा तथा नवोदित साहित्यकार की श्रेणी में रोशन बाफना को ‘ओम पुरोहित कागद स्मृति सम्मान’ से नवाजा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवती पुरोहित कागद ने की। एसकेडी यूनिवर्सिटी के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा स्वागताध्यक्ष रहे। मुख्य अतिथि शिक्षाविद् लालचंद कोचर, विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् डॉ. बीएल सहू, डॉ. सुमन चावला, प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय तथा आकाशवाणी सूरतगढ़ के नवीन सिसौदिया ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी के पूर्व वरिष्ठ उद्घोषक राजेश चड्ढा ने किया।
प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने ओम पुरोहित कागद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने कागद को ‘मुकम्मल इंसान’ बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था। उनमें गजब का आकर्षण था, जो सामने वाले को सहज ही अपनी ओर खींच लेता था। कागद ने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी तकलीफों को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया। उनका जीवन संघर्षों के बीच सकारात्मक बने रहने और निरंतर सृजन करते रहने की प्रेरणा देता है।
वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि ने कहा कि लोकजीवन में साहित्य का बेहद महत्व है। साहित्य समाज की संवेदनाओं, अनुभवों और लोक परंपराओं को शब्द देता है। उन्होंने साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ते हुए राजस्थानी भाषा की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. पद्मजा शर्मा ने ओम पुरोहित कागद की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने अपने साहित्यिक वक्तव्य के साथ गीतों की प्रस्तुति भी दी, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने भरपूर दाद दी। उन्होंने कागद की साहित्यिक संवेदना और उनके साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
नवोदित साहित्यकार रोशन बाफना ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्यकार अपने समय और समाज की वास्तविकताओं को शब्द देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुभवों की विरासत छोड़ता है। उन्होंने कागद की साहित्यिक यात्रा को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मुख्य अतिथि लालचंद कोचर ने साहित्य और शिक्षा के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज के बौद्धिक विकास में साहित्य की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशिष्ट अतिथि डॉ. बीएल सहू ने कागद के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए ऐसे आयोजनों को साहित्यिक परंपरा को जीवित रखने वाला प्रयास बताया। तरुण विजय ने साहित्य और सामाजिक सरोकारों के बीच संवाद की जरूरत पर बल दिया, जबकि नवीन सिसौदिया ने कागद की स्मृतियों को नमन करते हुए साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की बात कही। डॉ. सुमन चावला, एडवोकेट दिनेश दाधीच ने भी अपनी बात रखी। वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णकुमार आशु ने सम्मानित होने वाले साहित्यकारों के व्यक्तित्व व कृतित्व पर रोशनी डाली।
कागद फाउंडेशन के सचिव नरेश मेहन ने संस्था के गठन, उसकी साहित्यिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने फाउंडेशन की ओर से संचालित कागद पुस्तकालय के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कागद की स्मृति को केवल आयोजन तक सीमित रखने के बजाय साहित्य और पाठकीय संस्कृति को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में एसकेडी यूनिवर्सिटी के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र शुरू करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर संस्थागत प्रयास जरूरी हैं। जुनेजा ने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा में पीजी करने वाले जरूरतमंद युवाओं को कागद फाउंडेशन की अनुशंसा पर निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस घोषणा को साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण पहल माना गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को राजस्थानी भाषा एवं साहित्य में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा और क्षेत्र की साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में जिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र बठला, अजय भार्गव, राजस्थान आर्थिक परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संतोष राजपुरोहित, राज तिवाड़ी, पूर्व उप सभापति कालूराम शर्मा, भाजपा नेता प्रकाश तंवर, नरेश पुरोहित, भवानी शंकर शर्मा, सूर्यप्रकाश जोशी, मोहनलाल वर्मा, पवन शर्मा भादरा, डॉ. विक्रम सिंह औलख, गुरदीप सोहल, भारती पुरोहित, अंकिता पुरोहित, मनोज पुरोहित सहित काफी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार व साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया।







