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हनुमानगढ़ स्थित श्री खुशालदास विश्वविद्यालय के मेंटल वेलनेस एवं योग क्लब के तत्वावधान में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। डिपार्टमेंट ऑफ योगा और साइकोलॉजी के विद्यार्थियों व संकाय सदस्यों ने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख पुरातात्विक केंद्र कालीबंगा का दौरा कर प्राचीन इतिहास, तत्कालीन नगर नियोजन और सांस्कृतिक धरोहर को नजदीक से देखा व समझा। इस शैक्षणिक भ्रमण के अवसर पर श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यावहारिक और अनुभवात्मक ज्ञान के महत्व पर विशेष बल दिया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों को केवल चारदीवारी और किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा की सार्थकता तभी है जब विद्यार्थी पुस्तकों में पढ़े गए सिद्धांतों को धरातल पर प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकें। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का प्रत्यक्ष भ्रमण विद्यार्थियों के बौद्धिक और मानसिक क्षितिज को विस्तृत करता है। पुस्तकें हमें तथ्य बता सकती हैं, लेकिन जब कोई विद्यार्थी किसी प्राचीन सभ्यता की ईंटों, दीवारों, गलियों और अवशेषों के सामने खड़ा होता है, तो वह इतिहास को केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उसे जीता और महसूस करता है। इस प्रकार के भ्रमण से मिलने वाली सीख स्मृति पटल पर आजीवन अंकित रहती है।
बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि भारत की संस्कृति और इतिहास अत्यंत समृद्ध व गौरवशाली रहा है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, विरासत और गौरवपूर्ण परंपराओं से जोड़ना वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक अनिवार्य दायित्व है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से परिचित होगी, तभी उसमें राष्ट्र और संस्कृति के प्रति वास्तविक सम्मान और जिम्मेदारी की भावना जागृत होगी। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए मेंटल वेलनेस एवं योग क्लब सहित सभी आयोजकों की सराहना की।
विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन वरुण यादव ने भी विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्री खुशालदास विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पारंपरिक शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यावहारिक और अनुभवात्मक शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है।
वरुण यादव ने कहा कि इस प्रकार के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा विद्यार्थियों के भीतर स्वाभाविक जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध की भावना और अपने गौरवशाली अतीत के प्रति गहरी जागरूकता पैदा करती है। यह अनुभव विद्यार्थियों को विश्लेषणात्मक दृष्टि प्रदान करता है, जो उनके भविष्य के शोध कार्यों में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
शैक्षणिक दल ने डॉ. प्रियंका जोशी, पाल्मी घोष एवं अतुल के कुशल मार्गदर्शन में कालीबंगा के विभिन्न पुरातात्विक स्थलों और संग्रहालय का अवलोकन किया। मार्गदर्शकों ने विद्यार्थियों को सिंधु घाटी सभ्यता के इस महत्वपूर्ण स्थल के ऐतिहासिक कालखंड, उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों और तत्कालीन जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
विद्यार्थियों ने वहां मौजूद प्राचीन नगर नियोजन, सुव्यवस्थित आवासीय संरचनाओं, जल निकासी व्यवस्था तथा उस काल में उपयोग की जाने वाली विभिन्न सामग्रियों और कलाकृतियों का बारीकी से अध्ययन किया। विद्यार्थियों ने जाना कि हजारों वर्ष पूर्व भी हमारे पूर्वज वैज्ञानिक सोच और उत्कृष्ट वास्तुशिल्प के साथ जीवन यापन करते थे।
इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरातल से जोड़ना था। योग और मनोविज्ञान जैसे विषयों के विद्यार्थियों के लिए यह यात्रा विशेष रूप से ज्ञानवर्धक रही, क्योंकि इसने उन्हें प्राचीन मानव सभ्यता के रहन-सहन, सामाजिक ताने-बाने और सामूहिक जीवनशैली को गहराई से समझने का अवसर दिया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कालीबंगा के ऐतिहासिक महत्व पर आपस में विचार-विमर्श किया और इस अनुभव को अपने अध्ययन व शोध के लिए अत्यंत मूल्यवान बताया। कार्यक्रम में क्लब के सदस्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।






