




ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ चुनावी रणनीति को लेकर भी स्पष्ट संकेत दे दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की है कि पार्टी का प्रयास 50 प्रतिशत टिकट 50 वर्ष से कम आयु के युवाओं को देने का रहेगा। यह केवल टिकट वितरण का फैसला नहीं, बल्कि कांग्रेस की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें राहुल गांधी लगातार युवाओं को संगठन और राजनीति के केंद्र में लाने की वकालत करते रहे हैं।
इस घोषणा का समय भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न मुद्दों को लेकर जेन-जी (नई पीढ़ी) की सक्रिय भागीदारी और बढ़ती राजनीतिक एकजुटता ने सभी दलों का ध्यान युवाओं की ओर खींचा है। ऐसे माहौल में कांग्रेस का यह निर्णय युवा मतदाताओं और नए नेतृत्व को संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है।
इसी रणनीति को जमीन पर उतारने के उद्देश्य से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की ओर से चुनाव प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई। प्रदेशभर से आए करीब 500 प्रतिनिधियों को बूथ प्रबंधन, मतदाता सूची की समीक्षा, जनसंपर्क, चुनावी संवाद और संगठनात्मक समन्वय का प्रशिक्षण दिया गया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि कांग्रेस केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की तैयारी में जुट गई है।
कार्यशाला में गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पंचायत और निकाय चुनावों में सक्रिय तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। टिकट वितरण कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनस्वीकृति और संगठन के प्रति योगदान के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि नई पीढ़ी को नेतृत्व में पर्याप्त अवसर देना पार्टी की प्राथमिकता है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्थानीय निकाय चुनावों को लोकतांत्रिक संघर्ष और न्यायिक हस्तक्षेप का परिणाम बताते हुए भाजपा सरकार पर चुनावों में देरी, परिसीमन प्रक्रिया को लंबा खींचने और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं को बंद करने के आरोप लगाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के असंतोष को जनसमर्थन में बदलने का आह्वान किया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने चुनावी सफलता का आधार बूथ को बताते हुए प्रत्येक परिवार तक पहुंचने, मतदाता सूची का सूक्ष्म परीक्षण करने और सभी वर्गों से लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया। वहीं, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी.बी. यादव ने कहा कि कांग्रेस को भाजपा के राजनीतिक विमर्श के बजाय सत्य, अहिंसा, सामाजिक न्याय, सद्भाव और स्वराज जैसे वैचारिक मुद्दों को जनता तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन के लिए शीघ्र प्रदेश स्तरीय चुनाव सहायता समिति गठित करने की भी घोषणा की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस वास्तव में आधे टिकट युवाओं को देती है, तो यह राजस्थान की स्थानीय राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है। हालांकि इस रणनीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी टिकट वितरण में घोषित मानदंडों का कितना पालन करती है और युवा चेहरों को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रभावी राजनीतिक भूमिका भी देती है। ऐसे में आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन और युवा नेतृत्व की नई परीक्षा भी बन सकते हैं।








