




ग्राम सेतु पॉलिटिकल डेस्क
हनुमानगढ़ में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी भले ही संगठनात्मक एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन 3 अगस्त को महज आधे घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग स्थानों पर प्रस्तावित बैठकों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल दो अलग-अलग पोस्टरों ने यह संकेत दे दिया है कि चुनावी तैयारियों से पहले संगठन के भीतर शक्ति प्रदर्शन और नेतृत्व की खींचतान अभी भी खत्म नहीं हुई है।
पहला पोस्टर पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार के समर्थकों की ओर से सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। इसमें 3 अगस्त को दोपहर 3 बजे हनुमानगढ़ टाउन स्थित श्री जैन सभा, भटनेर किले के सामने बैठक आयोजित करने की सूचना दी गई है। यह सूचना शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जिनेंद्र जैन और देहात ब्लॉक अध्यक्ष संदीप सिद्धू के नाम से प्रसारित की गई है।
पोस्टर में आमंत्रित अतिथियों में जिला प्रभारी फुसाराम गोदारा, पूर्व विधायक चौधरी विनोद कुमार तथा पीसीसी सदस्य भूपेंद्र कुमार का नाम है। उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष मक्कासर का नाम शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, पूर्व जिला प्रमुख, पूर्व प्रधान, पूर्व सभापति, पूर्व उपसभापति, पूर्व सरपंच सहित अन्य पूर्व जनप्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित बताया गया है। बैठक का एजेंडा नगर परिषद चुनाव की तैयारियों और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा बताया गया है।
दूसरी ओर, जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से भी लगभग इसी उद्देश्य से एक अलग बैठक की सूचना जारी की गई है। इस बैठक का समय दोपहर 3.30 बजे और स्थान जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, हनुमानगढ़ जंक्शन रखा गया है। इस पोस्टर में जिला प्रभारी फुसाराम गोदारा, जिला सह प्रभारी डॉ. सुनील लारा, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र दादरी और पूर्व विधायक चौधरी विनोद कुमार की विशेष उपस्थिति का उल्लेख किया गया है। इसमें भी सभी पूर्व जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है।
दोनों बैठकों का उद्देश्य लगभग एक जैसा है और दोनों में कई समान नेता भी शामिल बताए गए हैं। ऐसे में राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब कांग्रेस एक संगठन है तो फिर एक ही दिन और लगभग एक ही समय पर दो अलग-अलग स्थानों पर बैठकों की जरूरत क्यों पड़ गई।
शहर ब्लॉक अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से कहा, ‘मुझे जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रस्तावित बैठक की कोई जानकारी नहीं है। पोस्टर में जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर का नाम संभवतः भूलवश छूट गया होगा।’ जिनेंद्र जैन का कहना है कि पहले ब्लॉक स्तर की बैठकों के आयोजन का अधिकार संबंधित ब्लॉक अध्यक्षों को होता था, बैठक आदि की भी सूचना नहीं मिलती है। सच तो यह है कि अब अधिकांश निर्णय डीसीसी स्तर पर लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार टाउन में होने वाली बैठक नगर परिषद चुनाव की रणनीति तय करने और कांग्रेस का बोर्ड बनाने की दिशा में खुली चर्चा के लिए बुलाई गई है।
उधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने स्पष्ट कहा कि उन्हें टाउन में किसी बैठक की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। ब्लॉक अध्यक्षों को सूचना नहीं दिए जाने के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि उनके पास संबंधित ‘स्क्रीनशॉट’ मौजूद हैं। उनका कहना है कि जिलाध्यक्ष बनने के बाद शहर ब्लॉक अध्यक्ष केवल एक बार आए, जबकि पार्टी की ओर से सरकार के खिलाफ 17 आंदोलन और प्रदर्शन किए गए, जिनमें वे 16 बार अनुपस्थित रहे।
डीसीसी चीफ मनीष मक्कासर ने दो टूक कहा कि कांग्रेस के अधिकृत निर्णय जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय से ही होंगे, किसी व्यक्ति विशेष के घर या अन्य स्थान से नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी आलाकमान ने जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में उन्हें व्यक्तिगत रूप से स्वीकार या अस्वीकार करना किसी की निजी सोच हो सकती है, लेकिन कांग्रेस संगठन के निर्णयों का पालन करना प्रत्येक कार्यकर्ता और नेता का दायित्व है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी का नया अध्याय है। पिछले विधानसभा चुनाव में हनुमानगढ़ सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद जनता द्वारा निर्वाचित नगर परिषद बोर्ड भी कांग्रेस के हाथ से निकल गया। इसके बावजूद कांग्रेस के भीतर समन्वय और सामूहिक नेतृत्व की मजबूत तस्वीर अब तक सामने नहीं आ सकी है।
निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच समानांतर बैठकों का आयोजन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सीधा असर संगठन की चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें 3 अगस्त की दोनों बैठकों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन बैठकों के बाद कांग्रेस एकजुटता का संदेश देने में सफल होती है या फिर यह घटनाक्रम निकाय चुनाव से पहले पार्टी की अंदरूनी कलह को और अधिक उजागर कर देता है।






