




ग्राम सेतु डेस्क.
शब्द जब समय की सीमाओं को लांघकर समाज की चेतना का हिस्सा बन जाते हैं, तब साहित्य केवल रचना नहीं रहता, बल्कि वह संस्कृति का जीवंत दस्तावेज बन जाता है। इसी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले प्रतिष्ठित ‘कागद सम्मान’ के लिए वर्ष 2026 के सम्मानित साहित्यकारों के नाम घोषित कर दिए गए हैं। इस वर्ष राजस्थानी साहित्य सम्मान के लिए श्रीडूंगरगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि, हिंदी साहित्य सम्मान के लिए जोधपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. पद्मजा शर्मा तथा युवा साहित्य सम्मान के लिए बीकानेर के युवा रचनाकार रोशन बाफना का चयन किया गया है।
इन नामों की घोषणा कागद फाउंडेशन की बैठक के बाद की गई। कागद पुस्तकालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती पुरोहित ‘कागद’ ने की। बैठक में साहित्य, आयोजन और सम्मान समारोह से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सर्वसम्मति से चयनित साहित्यकारों के नामों का अनुमोदन किया गया।
बैठक में वरिष्ठ साहित्यकार राजेश चड्ढा, नरेश मेहन और कृष्णकुमार ‘आशु’ ने तीनों सम्मानित साहित्यकारों के नामों की औपचारिक घोषणा करते हुए उनके साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि चयनित साहित्यकारों ने अपने लेखन के माध्यम से न केवल साहित्य को समृद्ध किया है, बल्कि समाज की संवेदनाओं, लोकजीवन, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त अभिव्यक्ति दी है।
फाउंडेशन ने निर्णय लिया कि सम्मान समारोह आगामी 12 अगस्त को एसकेडी विश्वविद्यालय, हनुमानगढ़ में आयोजित किया जाएगा। समारोह में साहित्यकार, चिंतक, शिक्षाविद, पाठक और साहित्य प्रेमी सहभागी बनेंगे। आयोजन को गरिमामय स्वरूप देने के लिए बैठक में विभिन्न समितियों का गठन किया गया तथा सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ. कृष्णकुमार रत्तू शिरकत करेंगे। बैठक में गोपाल झा, कालूराम शर्मा, डॉ. संतोष राजपुरोहित, भारती पुरोहित सहित अनेक सदस्यों ने आयोजन की रूपरेखा, साहित्यिक गतिविधियों के विस्तार तथा सम्मान समारोह की गरिमा को और ऊंचाई देने के संबंध में अपने विचार रखे। सभी सदस्यों ने इस आयोजन को साहित्य और समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बनाने का संकल्प दोहराया।
उल्लेखनीय है कि ‘कागद सम्मान’ आज हिंदी और राजस्थानी साहित्य जगत में एक अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान के रूप में स्थापित हो चुका है। अब तक अनेक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार इस सम्मान से अलंकृत हो चुके हैं। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष साहित्य जगत की निगाहें इस सम्मान की घोषणा पर टिकी रहती हैं।
कागद फाउंडेशन द्वारा यह सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय ओम पुरोहित ‘कागद’ की स्मृति में प्रदान किया जाता है। वर्ष 2017 में उनके निधन के बाद फाउंडेशन ने उनकी साहित्यिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया और 2018 से प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त, उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय स्तर पर इस सम्मान का आयोजन प्रारंभ किया। तब से यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण का अवसर नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, भाषा और मानवीय संवेदनाओं के उत्सव के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
इस वर्ष भी कागद सम्मान समारोह साहित्य साधना को नमन करने, वरिष्ठ रचनाकारों के योगदान को सम्मानित करने और युवा पीढ़ी को सृजन की नई प्रेरणा देने का सशक्त अवसर बनेगा। हनुमानगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय साहित्यिक विमर्श का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।







